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कहते है हिन्दूस्तानी है हम....(सत्यम शिवम)

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कहते है हिन्दूस्तानी है हम,
पर जुबान पे अंग्रेजों की भाषा बसती है,
देख के अपनी विलायती तेवर,
हिन्दी हम पर यूँ हँसती है।
क्या बचपन में पहला अक्षर,
माँ कहने में शर्माया था,
रोता था जब जब तू प्यारे,
लोरी ने चैन दिलाया था।

अब बढ़ी बुद्धि,अब बढ़ा ज्ञान,
हिन्दी को क्यों बदनाम किया,
जिसके साये में पल पल कर,
हम सब ने जग में नाम किया।

मीठी भाषा,प्यारी भाषा,
हिन्दी को बस आत्मसात करो,
अंग्रेजी भाषा है अपनी गुलामी,
उस भाषा में मत बात करो........।

"साहित्य प्रेमी संघ" की ओर से आप सभी हिन्दी प्रेमीयों को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.....
www.sahityapremisangh.com

स्कूल की ओर...

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आईये आप को  स्कुळ मे ले चले, देखिये ध्यान से पढे...... बहित लायक मास्टर हे इस स्कुल मे, अजी खुद ही देख ले, कोई शक, वैसे यहां के पढे लिखे लोग नेता बन जाते हे....

नाई रे नाई तेरा काम कैसा

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देखिये यह विडियो ओर फ़िर नाई की दुकान पर शेव करवाने जाये....


आज के यह महान बाबा, जिन्हे हम भगवान से ऊपर मानते हे

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अच्लिये आप को एक ऎसी साईट पर ले चलते हे, जहां कुछ ना कुछ सच तो हे ही १००% नही तो ९९% तो सत्य हे... देखिये इस लिंक पर जा कर

एक अति सुंदर फ़िल्म *राम चन्द्र पाकिस्तानी *

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                                                    यह बच्चा इस फ़िल्म का हीरो हे
कल रात को मैने एक फ़िल्म देखी... *रामचंद पाकिस्तानी* यह फ़िल्म हे तो पाकिस्तानी, ओर पाकिस्तानी फ़िल्मे खुद पाकिस्तानी भी नही देखते, लेकिन इस फ़िल्म के बारे कई लोगो से सुना था, ओर कल ही मैने नरेश सिह राठौड़ जी के ब्लाग *मेरी शेखावाटी* पर इस फ़िल्म के बारे पढा था, आज कल समय कम ही मिलता हे , लेकिन कल रात नींद नही आ रही थी सो मैने इस फ़िल्म को नेट पर ढुढां, ओर पहली ट्राई मे यह मिल गई,बीबी ओर बच्चे तो सो गये थे, मैने अकेले ही इस फ़िल्म को देखा.
कहानी तो ज्याद बडी नही लेकिन फ़िल्म ने मन को बांधे रखा, ओर अंत तक फ़िल्म दिल ओर दिमाग पर छाई रही, ऎसी फ़िल्मे बहुत ही कम बनती हे, एक साफ़ सुधरी ओर अच्छी फ़िल्म, जो देख कर भी आप को बार बार याद आये, अब इस की कहानी तो नही बताऊंगा, क्योकि अगर आप लोगो ने इसे देखना होगा तो मजा नही आयेगा, लेकिन इस फ़िल्म मे कुछ खास हे जो इसे देख कर ही बता सकते हे, ओर इस फ़िल्म को हम परिवार के संग बेठ कर भी देख सकते हे, अगर समय हो तो इसे जरुर देखे, अगर आप मे से किसी को इस फ़िल्म का लिंक चाहिये आन लाईण देखने के लिये तो मुझे लिखे मै मेल से इस का लिंक दे दुंगा, यहां इस फ़िल्म का लिंक दे कर कोई आफ़त मोल नही लेना चाहता, फ़िल्म की कापी ९८% साफ़ हे, पीसी पर देखने मे पुलिस की गंदी गंदी गालिया सुनानी पडती हे, अगर टी वी पर देखे तो सभी गालिया सेंसर हो जाती हे.
जिन्हे भी लिंक चाहिये आन लाईन देखने के लिये मुझे जरुर बतलाये, ओर लिंक पाये

आऒ इन से सीखे जिन्दगी को जीना...

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आज यू टुब पर कुछ विडियो मिले, उन्मे से एक विडियो मै आप सब के लिये छांट कर लाया, जो मुझे बहुत अच्छा संदेश देता लगा...आईये हम सब इस विडियो को एक बार देखे तो सही....फ़िर बतलाये केसा लगा...

होली हे जी होली हे....

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आप सभी को सपरिवार होली की बधाई ओर शुभकामनाऎ;

जगत का पिता.....(सत्यम शिवम)

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तन पे भस्म लेप रखा है,
गले में डाल रखा भुजंग,
नीलकंठ ने गरल को पीकर,
बेरंग को भी दे दिया है रंग।
खुद की सुध की खबर नहीं है,
जहाँ को बाँटते धन दौलत,
मेवा और मिष्ठान बिना भी,
भक्तों की भक्ति में होते रत।

इक बिल्व का पत्र चढ़ाकर,
पूजा,अर्चन करते लोग,
भाँग,धतूरा और गंगा जल,
शिव के प्रिय है ये सारे भोग।

जगत का पिता,महादेव,शिव,
डम डम,डमरु वाले है,
प्रेममयी,श्रद्धा के बस भूखे,
शिव तो भोले,भाले है।

गंगा को जो धारण करते,
भक्तों के हर कष्ट वो हरते,
अपने भक्त की खातिर ये शिव,
काल के कोप से भी लड़ते।

नटराज,त्रिपुरारी,शिव,शंकर,
भक्तों पर रखना आशीष,
सुधा की धारा बरसाना जग पर,
पी जाना यूँ ही जगत के सारे विष।

हम भी तो.......(सत्यम शिवम)

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हम भी तो नभ के पंक्षी से,
बस ढ़ुँढ़ रहे अपना ठिकाना,
क्या है पता अगले ही पल,
किसको पड़े यहाँ से जाना।
है जिंदगानी बस यहाँ वहाँ,
कल थे कहाँ,आज है कहाँ,
न जाने कैसा हो कल का जहाँ?

हम भी तो वन के मोर से,
बरखा का बाट जोह रहे,
खुशियों से हर पल नाच कर,
दुख की गठरी को ढ़ो रहे।

बस मन ही मन में खुश हो के,
कल के सपने संजोते है,
यादों की मालाओं में,
पल पल के मोती पिरोते है।

हम भी तो रात में तारों से,
टुट के दुनिया बसाते है,
टुटते तारों से जो माँगो,
वो पल में मिल जाते है।

बस रात भर का होता है,
अपना नगर निराला सा,
हर ख्वाब होता है,
बस टिमटिमाते तारों सा।

जो दिन में खो जाते है,
बस रात में नजर आते है,
और हमको लुभाते है।

हम भी तो बगिया के फूल से,
खिलते और मुरझाते है,
खुशबु की नदियाँ बहा के,
गुलजार का गुलशन सजाते है।

ये फूल तो मुरझा जाते है,
बस खुशबु ही रह जाती है,
हमारे बाद हमारी पहचान,
हमारे सुकर्म ही तो बनाती है।

हम भी तो नदियों के जल से,
खुद अपना जल नहीं पीते है,
धरती की छाती सींच कर,
हरी भरी दुनिया उगाते है।

नदियाँ तो सागर में मिल जाती है,
बस जल ही जल रह जाती है,
अपना ठिकाना पा के वो,
बड़ी चैन की साँस पाती है।

हम भी तो वृक्ष के फल से,
खुद अपना फल नहीं खाते है,
राही की भूख शांत कर,
मँजिल का राह दिखाते है।

राही तरु की छावँ में,
थक के जो आश्रय पाता है,
कितना सुकुन तब दिल को,
बस ये सोच के आता है,
किसी को दे के ठिकाना अपना क्या जाता है।

तुझे पा लिया……(सत्यम शिवम)

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तुमको कभी ऐसे पाऊँगा,
तुझमे ही मै खो जाऊँगा,
मर जाऊँगा,मिट जाऊँगा,
पर अब जुदा हो ना पाऊँगा।
मन के घनघोर बादलों पे,
जैसे छायी हो रात की कालिमा,
वैसे ही मै तुझमे समा के,
खुद को करुँगा लालिमा।

मेरी आत्मा,परमात्मा से,
मिल के जो सुख पायेगी,
मै कैसे कहूँ,क्या नाम दूँ,
शब्दों में कैसे व्यक्त करुँ?

उस मधुर मिलन की कामना।

जो बीत गया उसे भूल कर,
अंदर की आँख को खोल कर,
मन के दीपक की ज्योत जला,
तेरे चरणों में मन को लगा।

चाहूँगा मै तुझे ऐसे प्रभु,
जैसे मौत की शय्या पे पड़ा,
कोई चाहता हो जीने की लालसा।

चाहत मेरी ऐसे पूर्ण हो,
मधुबन में जैसे कोई जीर्ण हो,
हो लालसा मद्भाल की,
हो कामना बस प्यार की,
मधुशाला में भी जो रहे,
बन के प्याले की मद्लालसा।

अब तु रहेगा,मै रहूँगा,
और बस चाहत रहेगी,
तेरे साथ मै,मेरे पास तु,
बन के ख्वाहिश बस साथ चलेगी।

तु नैनों में बस जायेगा,
हर जगह तु ही नजर आयेगा,
हिन्दू भी तु,मुसलिम भी तु,
इसा भी तु कहलायेगा।

राजा भी तु,प्रजा भी तु,
शासित भी तु,शासक भी तु,
सुख दुख का सारा खेल तु,
सब भेदभाव मिट जायेगा।

मन स्वच्छंद उड़ता हुआ,
तब अपनी मँजील पायेगा।

सब को भूला,तु जो मिला,
बस तुझमे ही अब नेह लगा,
सब कष्ट मेरे अब मिट रहे,
जैसे पा लिया हो अमृत की थालसा।

तु साथ है,अब क्या प्यास है,
तु पास है,ये मेरी साँस है,
अब मै रहूँ तुझमे कहूँ,
तुझे पा लिया,तुझे पा लिया,
तुझको तो अब मै पा लिया। 

तुम बिन........(सत्यम शिवम)

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तुम बिन तो हम हरपल उदास है,
हर खुशी पास है, पर जाने किसकी आश है।
वो तो लगता है भूला देगी मुझे,
पर मै कैसे कहूँ, कि साँस तो चल रही है,
लेकिन धडकन उनके पास है।

तुम बिन हर मोर पर तन्हाई है,
महफिल में भी जिंदगी से मिली रुसवाई है।

कमबख्त इश्क भी क्या चीज है,
बिन कहे किसी को दिल दे देता है,
और मिलती है जब प्यास राहों में,
तो दरिया के साथ समंदर भर लेता है।

हर दर्द को दिल में कैद कर,
गम का सैलाब जो बनता है,
आँखे बरसने लगती है,
तुम बिन तो वो कुछ ना करता है।

किनारे पे भी आके मौजे लौट जाती है,
मँजिल के करीब भी आके राही,
रास्ता भूल जाता है।

तुम बिन तूफान आता है, और जाता है,
सदिया आती है, और जाती है,
सब मौसम फलक पे छाती है,
पर दिल से तेरी सूरत कभी ना जाती है।

तुम बिन दिन को रात लिखते है,
अकेले में खुद से ही बात करते है,

पलकों में ख्वाबों का बसेरा होता है,
बस तुम बिन कभी भी ना,
जीवन में सवेरा होता है।

बस तुम बिन, इक तुम बिन, तुम बिन.........

आ जाओ माँ.....(सत्यम शिवम)

स्वर मेरा अब दबने लगा है,
कंठ से राग ना फूटे,
अंतरमन में ज्योत जला दो,
कही ये आश ना टूटे।
तु प्रकाशित ज्ञान का सूरज,
मै हूँ अज्ञानता का तिमीर,
ज्ञानप्रदाता,विद्यादेही तु,
मै बस इक तुच्छ बूँद सा नीर।

विणावादिनी,हँसवाहिनी!
तुझसे है मेरा नाता,
बिना साज,संगीत बिना भी,
हर दम मै ये गाता।

तेरा पुत्र अहम् में माता,
भूल गया है स्नेह तुम्हारा,
भूल गया है ज्ञान,विद्या,
धन लोभ से अब है हारा।

आ जाओ माँ आश ना टूटे,
दिल के तार ना रुठे,
कही तुम बिन माँ तड़प तड़प के,
प्राण का डोर ना छुटे।

आओ एक खेल खेले.... लेकिन बच्चे ,महिलाये ओर कमजोर दिल इसे ना खेले Game free

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नीचे एक खेल दिया हे जिसे हम  सब ने समय पास करने के लिये  बहुत बार खेला हे, तो चलिये फ़िर से इसे खेले, अगर आप इस गेम मे जीत जाये तो आप को मान जायेगे.....


साबधान...... इसे बच्चे , नारिया ओर कमजोर दिल  लोग ना खेले, यह चेतावनी के बावजूद भी कोई खेले तो खुद जिम्मेदार होगा, धन्यवाद.


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तुम हो अब भी……...(सत्यम शिवम)

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मौन मेरा स्नेह अब भी,
जो दिया,तुमसे लिया मै।
प्यार मेरा चुप है अब भी,
क्यों किया,जो है किया मै।

तुम कही हो,मै कही हूँ,
तुम ना मेरी,मै नहीं हूँ।

पर है वैसा ही सुहाना,
प्यार का मौसम तो अब भी।

राहे मुझसे पुछती है,
है कहा तेरा वो अपना,
साथ जिसके रोज था तु,
खो गया क्यों बन के सपना।

तु गया है भूल या उसने ही दामन है चुराया,
पर मेरे जेहन में वैसी ही,
कुछ प्यारी यादें सीमटी है अब भी।

माना है मैने कि तुम हो दूर मेरे,
दूर हो के पास हो तुम साथ मेरे।

मै तुम्हे अब देखता हूँ आसमां में,
चाँद में,तारों में,
हर जगह जहा में।

सब में बस तेरी ही तस्वीर दिखती,
हर तस्वीर तुम्हारी है ये पूछती।

मै नहीं तेरी प्रिया कर ना भरोसा,
दूर रह वरना तु खायेगा फिर धोखा,
मै उन्हें बस ये ही कह के टालता हूँ,
साये से तेरा अपना वजूद निकालता हूँ।

कोई ना जाने किसी को क्या पता है?
मेरे दिल के घर में तो तुम हो अब भी।

बीती हुई हर बात में,
अपनी सभी मुलाकात में,
थे चंद सपने जो थे जोड़े तेरे मेरे साथ ने।

उन चाँदनी हर रात में,
भींगी हुई बरसात में,
मेरे आज में और कल में,
दबी दबी सी जिक्र तुम्हारी,
एहसास दिलाती तुम हो अब भी...........

हिन्द की माया………..(सत्यम शिवम)

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एक माँ ने आवाज लगायी,
एक ने तुझे गँवाया,
खोकर एक ने तुझे पा लिया,
हिन्द की है ये माया।
कितनों के सिंदूर कर्ज पर,
कई बहनों के राखी,
कितनों ने है भाई गँवाये,
अपने और संग संगाती।

माँ की गोद उजड़ गयी देखो,
बाप का साया छुटा,
दूर गया वो हमे छोड़कर,
देश से जोड़ा नाता।

लड़ता लड़ता सीमाओं पर,
देश का वीर सपूत,
अंगारों और तोप सा बन गया,
माँ के लाल का रुप।

मर कर भी वो देश की खातिर,
माँ भारती के रग रग में है जिया।

खुशबु बन कर आज है छाया,
मेरे देश के वीरों की काया।

हिन्द की है ये माया।

प्यार ने हम को निक्म्मा कर दिया, वर्ना हम भी आदमी थे काम के...

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अरे नोजवानो समभल जाओ, कही तुम भी आज कल के प्यार मे ऎसी गलती मत कर बेठना, जेसे इस दिवाने ने की हे.... इस से सवक लो, ओर सयाने बनो....


अब सवक लेने के लिये तो यहां किल्क करना पडेगा ना

आईये एक नया खेल खेले.....

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आज मे एक फ़ोरम पर भटकता भटकता पहुचां, वहां एक बहुत सुंदर आईडिया देखा... यानि एक अति सुंदर खेल, सो़चा चलिये आप सब के संग भी खेले.


यह खेल वेसे तो हम बचपन मे भी खेलते थे, लेकिन अब भुल गये थे, तो वहां जा कर याद आ गया, यह खेल ऎसा हे कि हम एक फ़िल्म का नाम आप को यहां बतायेगे, आप ने उस से मिलता जुलता ही जबाब लेकिन फ़िल्म के नाम से ही देना हे, किसी भी भरतिया फ़िल्म का, एक जबाब बार बार भी दे सकते हे, यानि एक नाम कई बार ले सकते हे, लेकिन वो जबाब मिलना चाहिये.... उदाहरण के तोर पर...

चलती का नाम गाडी...... जबाब... विकटोरिया ना० २०४....
ऎसे ही एक लम्बी कतार मे जबाब पर जबाब देते जाये, जिस का जबाब सही मेल नही खायेगा, उसे टॊक कर आप आगे जबाब दे सकते हे, लेकिन गलत टोकने वाले के भी ना० कम होते जायेगे, ओर जिस के सभी जबाब सही मेल खायेगे वो विजेता होगा.
तो शुरु करे....
डोली सजा के रखना..... जबाब,,,,,,?

जिन्दगी हो तो ऎसी हो...मस्त

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अजी हमारी क्या मजाल ऎसा कहे, आज तक सुनते आ रहे हे... पहले मां की सुनी, फ़िर बहिन की सुनी, इन के संग संग टीचर की सुनी, अब बीबी की सुनते हे, इस लिये यह हम नही कह रहे......:) वेसे बात तो काम की हे.

अगर विलायत मे आना हे तो देर मत करे जी जल्दी जल्दी जाये, क्योकि अब हनुमान जी ने संजीवनी बुटी लाने से तोबा कर ली हे, अब तो वीजे लगवा रहे हे, जल्दी कही देर ना हो जाये.

कर लो बात अरे भाई हम ने इंसानो की बात की हे खोते ओर गधो के वीजे यहां नही मिलते.


जेब मे जगह बनाने के लिये यह जगह भी अच्छी लगी. धन्यवाद


ताऊ के हाल शे, ताऊ जी क्या हाल हे जी

ब्लाग को बनाने ओर उस के बारे मे आप के सारे सवालो के जबाब

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हमारे नये ब्लागर अकसर जब ब्लाग बनबा लेते हे दोस्तो से तो उन्हे बार बार छोटी छोटी बातो के लिये  दुसरो का रास्ता ताकना पडता हे, या फ़िर बच्चो को बार बार तंग करते हे, अगर बच्चो को कुछ समझ हो, खास कर हमारी बुजुर्ग महिलाये जो ब्लाग पर कविताये, कहानियां, गजले, ओर अन्य जानकारियां तो बहुत अच्छी अच्छी देती हे, लेकिन थोडी सी कमी के कारण महीनो अपने पीसी से दुर रहती हे, ओर हमे उन के लेखो से वंचित रहना पडता हे,



लेकिन अब यह बिलकुल नही होगा, आज आप को मै इस ब्लाग जगत की सही चाबी पकडा देता हुं, ओर जब भी कोई मुसिबत आये तो मेरा नाम ले कर? अरे नही नही...... हा तो भगवान का नाम ले कर आप खुद ही इस मुसिबत से छूटकारा पा ले, बस यह काम जल्दी नही करना, बहुत आराम से स्टेप तू स्टेप बहुत ध्यान से, फ़िर आप भी मास्टर बन जायेगे जी.
लो जी चाबी तो आप को दी ही नही, ओर आप का दिमाग आधा खा गया, तो जनाब यह रही चाबी, अरे यहां किल्क करो ना, चाबी यही तो छिपा कर रखी हे, चलिये अब राम राम

मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।*जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा। महात्मा गांधी अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"महामना मदनमोहन मालवीय