स्कूल की ओर...
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राज भाटिय़ा
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चल चित्र
आईये आप को स्कुळ मे ले चले, देखिये ध्यान से पढे...... बहित लायक मास्टर हे इस स्कुल मे, अजी खुद ही देख ले, कोई शक, वैसे यहां के पढे लिखे लोग नेता बन जाते हे....
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मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।*जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा। महात्मा गांधी
अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की
शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"महामना मदनमोहन मालवीय



22 May 2011 4:36 PM
अंग्रेजी है ही ऐसी दिमागतोड़ू भाषा। सन्डे व एपिल तो फोनेटिक बता रहे हैं।
22 May 2011 4:48 PM
इस स्कूल के बच्चे नेता ही बन सकते हैं| धन्यवाद|
23 May 2011 8:39 AM
हा-हा ...
जो भी हिन्दी तो ठीक है ना।
24 May 2011 8:27 AM
बिलकुल सही बात है। जयहिन्द।
26 May 2011 10:01 AM
क्या बात है ... जै हो नेता जी ...
26 May 2011 1:48 PM
सुना है जो स्कूल नहीं जाते वह नेता बनते हैं, या फिर नेता शयन कक्ष में बनाए जाते हैं.
29 May 2011 8:54 PM
बहुत बढ़िया,क्या बात है
- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com
31 May 2011 10:06 AM
बहुत ही बढ़िया !
मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion
31 May 2011 8:01 PM
जय जय जय जय हो....
5 June 2011 8:26 AM
सच में जय हो ....
24 June 2011 8:03 PM
शिक्षा के स्तर में सुधार की गूंजाइस का संकेत है .
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