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जगत का पिता.....(सत्यम शिवम)

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तन पे भस्म लेप रखा है,
गले में डाल रखा भुजंग,
नीलकंठ ने गरल को पीकर,
बेरंग को भी दे दिया है रंग।
खुद की सुध की खबर नहीं है,
जहाँ को बाँटते धन दौलत,
मेवा और मिष्ठान बिना भी,
भक्तों की भक्ति में होते रत।

इक बिल्व का पत्र चढ़ाकर,
पूजा,अर्चन करते लोग,
भाँग,धतूरा और गंगा जल,
शिव के प्रिय है ये सारे भोग।

जगत का पिता,महादेव,शिव,
डम डम,डमरु वाले है,
प्रेममयी,श्रद्धा के बस भूखे,
शिव तो भोले,भाले है।

गंगा को जो धारण करते,
भक्तों के हर कष्ट वो हरते,
अपने भक्त की खातिर ये शिव,
काल के कोप से भी लड़ते।

नटराज,त्रिपुरारी,शिव,शंकर,
भक्तों पर रखना आशीष,
सुधा की धारा बरसाना जग पर,
पी जाना यूँ ही जगत के सारे विष।

10 टिपण्णी:
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मनोज कुमार said...
1 March 2011 at 5:37 PM  

महाशिवरात्रि पर यह अनुपम भेंट ब्लॉगजगत को।
महारात्रि की शुभकामनाएं।

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राज भाटिय़ा said...
1 March 2011 at 8:10 PM  

बहुत सुंदर स्तुति, आप को महारात्रि की शुभकामनाएं।

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चैतन्य शर्मा said...
2 March 2011 at 12:55 AM  

आपको महाशिवरात्रि ही हार्दिक शुभकामनायें

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प्रवीण पाण्डेय said...
2 March 2011 at 4:28 AM  

इस पर्व की शुभकामनायें।

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निर्मला कपिला said...
2 March 2011 at 6:10 AM  

महाशिवरात्रि पर इतनी सुन्दर स्तुति मन आनन्द से भार गया।
आपको महाशिवरात्रि ही हार्दिक शुभकामनायें

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सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...
8 March 2011 at 11:53 AM  

om namah shivay .

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ज्योति सिंह said...
15 March 2011 at 8:58 PM  

गंगा को जो धारण करते,
भक्तों के हर कष्ट वो हरते,
अपने भक्त की खातिर ये शिव,
काल के कोप से भी लड़ते।
har har mahadev ki jai .

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Amrita Tanmay said...
7 April 2011 at 5:29 AM  

Chidanand rupa shivohm-shivohm..naman jagatpita ko..

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Richa P Madhwani said...
8 June 2011 at 7:49 AM  

nice post

http://shayaridays.blogspot.com

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:07 AM  

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