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प्यार ने हम को निक्म्मा कर दिया, वर्ना हम भी आदमी थे काम के...

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अरे नोजवानो समभल जाओ, कही तुम भी आज कल के प्यार मे ऎसी गलती मत कर बेठना, जेसे इस दिवाने ने की हे.... इस से सवक लो, ओर सयाने बनो....


अब सवक लेने के लिये तो यहां किल्क करना पडेगा ना

15 टिपण्णी:
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मोहिन्दर कुमार said...
14 January 2011 at 11:48 AM  

सुन्दर

कोई शर्त होती नहीं प्यार में
मगर प्यार शर्तों पर तुमने किया
नजर में सितारे जो चमके जरा
बुझाने चली आरती का दिया

ही ही

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प्रवीण पाण्डेय said...
14 January 2011 at 2:12 PM  

वाह, यही है प्यार की शर्त।

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मनोज कुमार said...
14 January 2011 at 3:26 PM  

हा-हा-हा.... मज़ेदार!

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डॉ. मनोज मिश्र said...
14 January 2011 at 4:45 PM  

मज़ेदार!....

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anshumala said...
14 January 2011 at 6:29 PM  

इसे कहते है प्यार में अँधा होना |
वैसे कुछ सर्ते तो वाजिब है जी |

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गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...
15 January 2011 at 1:38 PM  

ये कैसा प्यार है जो जान ही निकाल दे

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Kunwar Kusumesh said...
15 January 2011 at 4:18 PM  

oh god

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विनोद कुमार पांडेय said...
15 January 2011 at 6:22 PM  

शर्त मानने के बाद अब क्या हो सकता है| भगवान बचाए ऐसे मर्दों को...सावधानी की नितांत ज़रूरत है| बढ़िया ज्ञानवर्धक जानकारी....:) .........आभार

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DR. ANWER JAMAL said...
16 January 2011 at 4:06 PM  

मंदिर , मस्जिद , मज़ार , थान या कुछ और हर चीज़ ज़रूर गिरा दी जाये लेकिन लोग ऐसा कब करने देते हैं ?
हो सकता मुसलमान कट्टर होते हों लेकिन जब भाई मोदी जी ने अपने एरिया में मंदिर ढाने शुरू किये तो हिन्दू भाईयों की सारी समझदारी लुप्त हो गयी और उनकी आस्था जाग गयी .
हिन्दू हो या मुसलमान , आज हरेक को अपनी मान्यताओं और आचरण को लोकहितकारी बनाना होगा वरना लोग उनकी नुक्सानदेह कुश्ती को देखकर नास्तिक बनते चले जायेंगे .
ऐसा कुछ करना चाहिए की लोग अपनी मान्यताओं के साथ जियें लेकिन देश के कानून का भी पालन करना सीखें .
आपकी पोस्ट अच्छी लगी , राज जी से सहमत हूँ और दीगर से भी हूँ लेकिन बाद में .
क्योंकि आज तक कभी मैं राज जी का नाम लेकर सहमति न जता सका .
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/01/like-cures-like.html

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निर्मला कपिला said...
18 January 2011 at 5:33 AM  

ये आजकल का प्यार है। वर्ना हमेशा तो घर से औरत ही निकाली जाती रही है। मै तो उसे शाबाश दूँगी आखिर एक तो अपवाद मिला समाज मे कि पत्नि भी ऐसा कर सकती है बच के रहना रे बाबा---

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दिगम्बर नासवा said...
18 January 2011 at 7:46 AM  

नमस्कार भाटिया जी ...
ऐसे प्यार के भी क्या कहने ...

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Harman Preet Kaur said...
20 January 2011 at 8:44 AM  

bouth he aacha lagaa aapka blog sir...nice post

Dear Friends Pleace Visit My Blog Thanx...
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विजय प्रताप सिंह राजपूत (निकू ) said...
21 January 2011 at 4:42 PM  

बहुत ही सुन्‍दर

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Rohit joshi said...
22 January 2011 at 3:10 PM  

ब्‍लॉग्‍स की दुनिया में मैं आपका खैरकदम करता हूं, जो पहले आ गए उनको भी सलाम और जो मेरी तरह देर कर गए उनका भी देर से लेकिन दुरूस्‍त स्‍वागत। मैंने बनाया है रफटफ स्‍टॉक, जहां कुछ काम का है कुछ नाम का पर सब मुफत का और सब लुत्‍फ का, यहां आपको तकनीक की तमाशा भी मिलेगा और अदब की गहराई भी। आइए, देखिए और यह छोटी सी कोशिश अच्‍छी लगे तो आते भी रहिएगा


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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:10 AM  



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