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एक अति सुंदर फ़िल्म *राम चन्द्र पाकिस्तानी *

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                                                    यह बच्चा इस फ़िल्म का हीरो हे
कल रात को मैने एक फ़िल्म देखी... *रामचंद पाकिस्तानी* यह फ़िल्म हे तो पाकिस्तानी, ओर पाकिस्तानी फ़िल्मे खुद पाकिस्तानी भी नही देखते, लेकिन इस फ़िल्म के बारे कई लोगो से सुना था, ओर कल ही मैने नरेश सिह राठौड़ जी के ब्लाग *मेरी शेखावाटी* पर इस फ़िल्म के बारे पढा था, आज कल समय कम ही मिलता हे , लेकिन कल रात नींद नही आ रही थी सो मैने इस फ़िल्म को नेट पर ढुढां, ओर पहली ट्राई मे यह मिल गई,बीबी ओर बच्चे तो सो गये थे, मैने अकेले ही इस फ़िल्म को देखा.
कहानी तो ज्याद बडी नही लेकिन फ़िल्म ने मन को बांधे रखा, ओर अंत तक फ़िल्म दिल ओर दिमाग पर छाई रही, ऎसी फ़िल्मे बहुत ही कम बनती हे, एक साफ़ सुधरी ओर अच्छी फ़िल्म, जो देख कर भी आप को बार बार याद आये, अब इस की कहानी तो नही बताऊंगा, क्योकि अगर आप लोगो ने इसे देखना होगा तो मजा नही आयेगा, लेकिन इस फ़िल्म मे कुछ खास हे जो इसे देख कर ही बता सकते हे, ओर इस फ़िल्म को हम परिवार के संग बेठ कर भी देख सकते हे, अगर समय हो तो इसे जरुर देखे, अगर आप मे से किसी को इस फ़िल्म का लिंक चाहिये आन लाईण देखने के लिये तो मुझे लिखे मै मेल से इस का लिंक दे दुंगा, यहां इस फ़िल्म का लिंक दे कर कोई आफ़त मोल नही लेना चाहता, फ़िल्म की कापी ९८% साफ़ हे, पीसी पर देखने मे पुलिस की गंदी गंदी गालिया सुनानी पडती हे, अगर टी वी पर देखे तो सभी गालिया सेंसर हो जाती हे.
जिन्हे भी लिंक चाहिये आन लाईन देखने के लिये मुझे जरुर बतलाये, ओर लिंक पाये

13 टिपण्णी:
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प्रवीण पाण्डेय said...
15 April 2011 at 6:43 PM  

देखते हैं।

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Ashok Pandey said...
16 April 2011 at 1:44 AM  

वाह..सरहद पार भी खिलती है धूप..वहां भी उगता है सूरज...

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डॉ टी एस दराल said...
16 April 2011 at 5:16 AM  

जी ढूंढते हैं और देखते हैं ।

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निर्मला कपिला said...
16 April 2011 at 7:27 AM  

भाटिया जी हमे तो मुद्दतें हो गयी कोई भी फिल्म देखे। आप लिन्क भेज दीजिये देख लेते हैं। धन्यवाद।

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गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...
16 April 2011 at 4:34 PM  

सुना तो बहुत है इसके बारे मे पर देखने का मौका नहीं मिल पा रहा। फिर कोशिश करता हूं।

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अन्तर सोहिल said...
19 April 2011 at 7:54 AM  

यूटयूब पर तुरंत लिंक मिल गया है जी, फुल मूवी का
आज देखता हूँ

प्रणाम

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दिगम्बर नासवा said...
20 April 2011 at 12:15 PM  

आप तारीफ़ कर रहे अहीं तो फिल्म ज़रूर अच्छी होनी चाहिए .... ज़रूर देखूँगा ...

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ज्योति सिंह said...
28 April 2011 at 2:21 PM  

wakai film to bahut achchhi lag rahi ,dekhne ki koshish rahegi .

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इंदु पुरी गोस्वामी said...
9 May 2011 at 4:46 AM  

मुझे भी देखनी है ये फिल्म.कई दिनों से सोच रही थी.आज कहानी पढ़ी.लगा बस अब तो देखनी ही है.

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इंदु पुरी गोस्वामी said...
9 May 2011 at 6:09 AM  

he bhgwan! inko to jb fursat milegi tb link denge.chlo main hii dhoondhne kii koshish krti hun.iskii kahani maine kahin pdhi thi.achchhi lgi.fir................ye naam dimaag se nikl gaya.
'dimag se nikl gaya'????? ha ha ha yani mere paas dimag hai?
ye bhii bhool jaati hun.kya krun?
aisich hun main to.

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सोमेश सक्सेना said...
9 May 2011 at 9:19 AM  

यह फिल्म मैंने कोई दो साल पहले दखी थी. सच में अच्छी है. इसके अलावा मुझे दो और पाकिस्तानी फ़िल्में पसंद आईं. "खामोश पानी" और "खुदा के लिए" . दूसरी वाली तो कमाल कि फिल्म है. भारत में भी ऐसी फ़िल्में कम ही बनतीहैं.

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Sudhir Singh said...
21 October 2014 at 4:39 AM  

kaise jane,hint chahia

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:06 AM  

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