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विचार

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नमस्ते.
अगर आप सदा स्वयं की दूसरो के साथ तुलना करते रहते है, तो आप अवश्य ही अहंकार अथवा ईषर्य़ा के शिकार हो जायेंगें

14 टिपण्णी:
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रविकांत पाण्डेय said...
2 October 2009 at 4:48 AM  

उत्तम विचार। धन्यवाद।

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जी.के. अवधिया said...
2 October 2009 at 5:36 AM  

बहुत सुन्दर विचार है भाटिया जी!

एक विचार मेरी और से भीः

"स्वयं की तुलना कभी भी किसी अन्य से न करें, यदि आप करते हैं तो स्वयं का ही अपमान करते हैं।"

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सुशील कुमार छौक्कर said...
2 October 2009 at 7:01 AM  

सुन्दर विचार।

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"अर्श" said...
2 October 2009 at 7:10 AM  

chhoti nahi bahut badi baat kahi hai aapne bhatiya ji namaskaar..sahib


arsh

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Arvind Mishra said...
2 October 2009 at 7:29 AM  

खबर्दारिया विचार !

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ताऊ रामपुरिया said...
2 October 2009 at 1:24 PM  

बहुत नायाब विचार.

रामराम.

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M VERMA said...
2 October 2009 at 5:49 PM  

सुन्दर विचार

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Suman said...
2 October 2009 at 9:04 PM  

nice

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अल्पना वर्मा said...
3 October 2009 at 9:50 AM  

saty vachan!

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अर्शिया said...
3 October 2009 at 12:23 PM  

अच्छा है।
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Rajey Sha said...
3 October 2009 at 3:44 PM  

मैं अपनी तुलना किसी से नहीं कर रहा, यह भी अहंकार का कारण हो सकता है।

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Nirmla Kapila said...
3 October 2009 at 4:06 PM  

बहुत सुन्दर और सत्य वचन हैं धन्यवाद

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monali said...
5 October 2009 at 12:28 PM  

Is vichaar ka to pata nahi..bahut gehra h shayad... lkn aapka vichaar muje bahut achha laga... ye sundar vichaar hamare sath baantne k liye shukriya...

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:41 AM  


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