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आज का विचार

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आज का विचार...
समस्यां चाहे कैसी भी हों, परन्तु इन से घबराइये नही, बल्कि इन्हें परीक्षा समझ कर पास कीजिये.

24 टिपण्णी:
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जी.के. अवधिया said...
4 October 2009 at 9:17 AM  

बिल्कुल सही बात!!

जिस प्रकार से बिना चाबी के कोई ताला नहीं होत उसी प्रकार बिना हल के कोई समस्या नहीं होती।

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"अर्श" said...
4 October 2009 at 9:26 AM  

अनमोल बातें होती हैं आपके विचारों में .. आभार

अर्श

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विनोद कुमार पांडेय said...
4 October 2009 at 9:27 AM  

आत्मविश्वास बढ़ाता सुंदर विचार...धन्यवाद

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पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
4 October 2009 at 10:06 AM  

उत्तम विचार्!
ऎसी कोई समस्या नहीं है,जिसका कि हल न हो......जरूरत है तो बस हौंसले और सही प्रयास की ।

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खुशदीप सहगल said...
4 October 2009 at 10:07 AM  

राज जी, लोहा आग में तप-तप कर ही कुंदन बनता है...

एक बात और मैं महसूस कर रहा हूं आप भारत से बाहर रहते हुए भी भारतीयता से ज़्यादा जुड़े हुए हैं...हम भारत में रहने वालों से कहीं ज़्यादा यहां की मिट्टी की सोंधी खुशबू आपकी बातों-सासों में रची-बसी है
...आपने गगन जी से पूछा था कि क्या अब भी देश में भाजी में मठ्ठियां, शकर पारे, बालू शाही, गुड़ की मिठाई भेजने का रिवाज बचा है...बड़े शहरों की तो कह नहीं सकता लेकिन छोटे शहरों में आज भी इस परंपरा को बड़े मान के साथ निभाया जाता है...कभी भारत आएं तो खिदमत का मौका दीजिए...सारे रस्मों-रिवाज से आपको रू-ब-रू करा देंगे...

जय हिंद...

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समयचक्र - महेंद्र मिश्र said...
4 October 2009 at 10:14 AM  

प्रेरक अनमोल विचार राज जी . आभार

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P.N. Subramanian said...
4 October 2009 at 10:24 AM  

हमारी कमेन्ट गुम हो गयी. आपने सही कहा है. लेकिन एक बात याद रखने की है की परीक्षा में हमेशा पास हो जाएँ यह जरूरी नहीं है. फेल होने पर निराश हुए बगैर दुबारा परिश्रम कर इम्तहान दिया जाता है.

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अजय कुमार झा said...
4 October 2009 at 10:34 AM  

एक पंक्ति में जीवन का सारा सार कह डाला आपने..जो ये समझ पाते हैं...जीवन वही जीते हैं..अन्य लोगों की तो जिंदगी होती है....जो बीत ही जाती है..

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Arvind Mishra said...
4 October 2009 at 10:59 AM  

आपने तो सफल जीवन का फंडा ही क्लीयर कर दिया !

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M VERMA said...
4 October 2009 at 12:44 PM  

डरने वाले कब जीतते है भला.
सुन्दर विचार

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mehek said...
4 October 2009 at 2:56 PM  

sunder vichar,sahi hame samasya se ghabarana nahi chahiye.

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Anil Pusadkar said...
4 October 2009 at 6:48 PM  

ट्राई करेंगे भाटिया जी।

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दिगम्बर नासवा said...
4 October 2009 at 6:51 PM  

SATY VACHASN BHAATIYA JI .....SAMASYA SE GHABRAAYE BINA USKA SAAMNA KARNA HI PURUSHAARTH HAI ...

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cmpershad said...
4 October 2009 at 7:06 PM  

विचार अच्छा है पर राह कठिन:)

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बवाल said...
4 October 2009 at 7:18 PM  

100 फ़ीसदी सच।

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पी.सी.गोदियाल said...
5 October 2009 at 6:50 AM  

बिलकुल भाटिया साहब, इंसान वही है जो परिस्थितियों से डट कर मुकाबला करे ! एक सद विचार

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Vijay Kumar Sappatti said...
5 October 2009 at 12:44 PM  

raaj ji ,
namaskar
aapke aaj ke is vichar ne man prafullit kar diya

main zindagi ki kuch samasyaao se guajar raha hoon ,aur aaj aapke vichar ko padhkar bahut accha laga

aapko pranaam..

regards,

vijay

pls read my 100th post .
www.poemsofvijay.blogspot.com

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ज्योति सिंह said...
5 October 2009 at 8:30 PM  

shat prtishat satya hai bhatiya ji .niti vachan jeene ki umeed jagate hai ,hausala badhate hai .
apni aur se bhet swaroop ek amrit vachan main bhi ....
doosaron ki fuhrta pe hasna ,apni fuhrata pragat karana hai .

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वन्दना अवस्थी दुबे said...
6 October 2009 at 10:35 AM  

सच्ची और अच्छी बात..

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शरद कोकास said...
6 October 2009 at 7:11 PM  

फेल भी हो जाये तो फिर परीक्षा मे बैठे और पास करे

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raj said...
5 August 2010 at 3:22 PM  

hameha kush raho.

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अशोक बजाज said...
13 June 2011 at 8:24 PM  

जिन्दगी इम्तहान लेती है .

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Nageshwar Sahu said...
22 November 2012 at 8:01 AM  

Student Period is golden period of all life period.....

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:40 AM  


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