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जब दिल ही दगा दे जाये तो.....

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नमस्कार , मेने जब अपनी पहली पोस्ट( इस महीने की) लिखी ओर वादा किया कि कल से मेरी बाकी पोस्ट छोटी छोटी बातो नाम के ब्लांग पर प्रकाशित करूंगा.... ओर वो कल मेरे से बहुत दुर चला गया था, यनि दुसरे दिन सुबह जल्द उठा, ओर बच्चो को भी छुटिया थी, मुझे भी एक सप्ताह की ओर छुट्टी थी, आज बच्चो का अलग अलग कमरा करना था, थोडा काम कल रात को कर दिया था, बाकी छोटे मोटे काम मेने सुबह सुबह शुरु कर दिये, थोडी देर के लिये टेलीफ़ोन बन्द किया, ओर लाईन दुसरी तरफ़ से बनाई, फ़िर इंट्रनेट का कनॆकशन लगाया ओर चेक किया, एक तार बडॆ लडके के कमरे मै लेजानी थी, सोचा तारो का जाल नही दिखे इस लिये इस तार को भी छुपा कर ले जाये जाये ? बस इसी तार को ले कर उलझण मे था, इतनी देर मै बच्चे भी उठ गये, ओर तार को लगाने की पुरी तेयारी हो गई.

tujh se naraz nahi...

बस तभी मेरे को बहुत गर्मी लगने लगी, ओर थोडा चक्कर भी आया, तो मै अपने बेटे के बेड पर लेट गया, ओर पानी का गिलास गटक गया, लेकिन आराम नही आया, तो नीचे अपने बेड रुम मै आ गया, ओर खिडकी पुरी खोल दी ओर बीबी को बोला की अफ़्रिकन पंखे से मुझे हाथ से खुब हवा करो, लेकिन बेचेंनी बढती गई, इतना पानी पीने के वाबजुद मेरी जुबान सुखती गई, ओर हाथ पेरो की ताकत भी कम होने लगी, दिल घबराने लगा, तभी किसी आशिक कि तरह से हाथ दिल पर गया तो देखा की दिल पागलो की तरह से धडक रहा है, यानि बहुत तेज.... बीबी को आवाज दी... वो भी घवरा गई, थोडी देर तक दिल(छाती ) को हाथो से दबाता रहा.... लेकिन पसीने से तरबतर होता रहा, फ़िर धीरे धीरे लगा कि मेरी ताकत खत्म हो रही है.

फ़िर मेने बडॆ बेटे को आवाज दी कि जल्द से एमबुलेंस को फ़ोन मिला, बेटे ने एमबुलेंस को फ़ोन मिलाया... करीब तीन मिंट मे डा० ओर दो मिंट बाद एमबुलेंस ओर एक डा० ओर आ गया, अब तक मुझे दिखना धुंधला हो गया था, ओर सांस लेने मै काफ़ी कठिनाई हो रही थी, डा० ने सब से पहले चेक किया ओर मेरी हालात देख कर मुझे आक्सीजन लगा दी, जिस से मुझे फ़िर से सांस आनी शुरु हो गई,कुछ पुछते रहे ओर मेरे कई अलग अलग पास मांगते रहे, जिसे मेरे बेटे ने उन्हे दे दिया, फ़िर मुझे उठा कर एम्बुलेंस मै लेजाने लगे, तो मेने कहा कि मै पेदल चल सकता हुं, तो मै पेदल ही दो डा० ओ के सहारे एमबुलेंस तक गया, उस के बाद मेरी आंख खूली तो मै अस्पताल मै लेटा था, ओर बहुत सी मशीने लगी थी, मै करीब एक दिन एमर्जेंसी कमरे मै रहा, मेरे शरीर मै तारे ही तारे लगी थी, फ़िर आक्सीजन, फ़िर आई सी जी पता नही क्या क्या लगा रखा था, मेरी हल्की सी हरकत पर परियो सी सुंदर नर्स झट आ जाती थी, फ़िर शाम को बच्चे ओर बीबी मिलने आये, फ़िर डा आया ओर उस ने सारी बात मेरे बच्चो को समझाई कि कल इन्हे बिजली के झटके दिये जायेगे, ओर पेट मे नाल डाल कर भी चेक अप किया जायेगा, क्योकि दिल सही काम नही कर रहा, फ़िर मुझे समझाया गया किया सारा काम हम आप को बेहोश कर के करेगे, दुसरे दिन सुबह मुझे नाश्ता नही दिया गया, ओर मै इंतजार मै था कब .... लेकिन तभी एक हसीन सी नर्स नाश्ते की ट्रे ले कर आई ओर बोली लिजिये नाश्ता किजिये?? मुझे विशवास नही आया तो मेने उस से पुछा क्या यह नाश्ता मेरे लिये है ? तो बोली जी आप के लिये ही है, मुझे भुख नही थी लेकिन मेने मना नही किया, तभी ड्रा जी आ गये ओर कहा कि दवा से आप का दिल काबू मै आ गया, ओर ऎसा होता बहुत ही कम है, अब आप को ना तो झटके दिये जायेगे, ओर नही, पेट मे नाली डाली जाये गी? तबीयत ठीक हुयी तो मुझे दुसरे कमरे मै लेजाया गया.

आज यह लेख लिख रहा हुं, लेकिन आज इसे पोस्ट नही कर पाऊगां, आज शनि वार है, ओर तबीयत आगे से काफ़ी अच्छी हो गई है, लेकिन अब सारा दिन करे तो क्या करे, बच्चे मिलने आये थे तो उन के हाथ लेप ताप मंगवा लिया, ओर इस कबकत दिल का हाल आप को लिख दिया, असल मे मुझे भारत यात्रा के दोरान भी ऎसा ही एक दो बार हुआ था भारत मै, मेने सोच कि गर्मी है, फ़िर यहां आने के बाद भी हुया, लेकिन आखरी झटके ने हिला दिया, सारी चेकिंग के बाद डा ने कहा कि आप के दिन कि लेफ़्ट वाली दिवार काफ़ी मोटी है, ओर आप का खुन भी काफ़ी गाढा है, दिल कि दिवार मोटी होने की वजह से दिल अपना काम ठीक से नही कर सकता, उपर से खुन बहुत गाढा है, ओर अब सोम या मंगल बार तक मै यहां रहुंगा, ओर मुझे अलग अलग डोस दे कर देख रहे है कि कोन सी डोस सही रहेगी ( Marcumar ) इसे डा लोग अच्छी तरह से जानते है, यानि अभी हार्ड अटेक नही हुया लेकिन हो सकता था.

आज सोम बार की सुबह थी, मै करीब आठ बजे ऊठ गया, ओर नाश्ता वगेरा कर के ड्रा की इंतजार करने लगा, लेकिन आज शाम के चार बज गये ओर हमारे ड्रा जी नही आये, क्योकि मुझे उम्मीद थी की आज या कल मै घर वापिस चला जाऊंगा, तभी नर्स ने बताया कि ड्रा आ रहा है, थोडी देर बाद ही ड्रा ओर सहायक ड्रा दोनो हमारे कमरे मै आये, मेरे कमरे मेरे मेरे सिवा एक जर्मन था, पहले मुझे चेक किया, ओर कहा कि आप के फ़ेफ़डो मै पानी था हम ने उसे दवा से निकालने की कोशिश कि लेकिन अभी भी थोडा है, अगर नही निकला तो हम कल या परसो टोमोग्राफ़ी करेगे, दुसरा आप का खुन भी बहुत गाडा है, इसे भी दवा से पतला करना है, ओर जब तक हम आप की सेहत से बेफ़िक्र नही हो जाते तब तक आप को यहां रहना पडेगां, ओर आप का वजन भी रोजाना कम हो रहा है, फ़िर मै उदास सा फ़िर से बेड पर आ कर लेट गया.............

तभी हमारे मिलने जुलने वाले भी आते रहे, तो एक बुजुर्ग भारतीया ने कहा कि आप घर के लिये जल्दी मत मचाना, ड्रा को अपना सारा काम कर लेने देना, फ़िर मैने अलग अलग दवा खाई ओर रोजाना अलग अलग टेस्ट होते फ़िर अगले रोज ही ड्रा जी आये ओर बोले की आप की तबीयत केसी है ? मेने कहा पहले से अच्छा हुं, तो बोले की अब नाक से पतली पाईप लगाने की जरुरत भी नही दवा से आप के फ़ेफ़डो का पानी भी खत्म हो गया है, कल दोपहर के बाद आप घर जा सकते है, ओर उस के बाद सब बाते समझाई कि दवा खानी जरुर है ओर दिल का चेक अप साल मे कम से कम तीन बार करवाना जरुरी है, .... ड्रा के जाते ही मेने बच्चो को यह खुशखबरी सुनाई.

ओर कल १९/०८/०९ को शाम को घर पर आ गया, लेकिन कमजोरी बहुत हो गई है, ओर अभी दस पंद्रहा दिन घर पर ही आराम करुगा, कल परसो से फ़िर से अपनी पोस्टे पोस्ट करुंगा, आप सब का धन्यवाद जिन्होने मेरी मां के निधन पर मुझे सहारा दिया अपनी टिपण्णियो के सहारे....

आप मेरी मजबुरी समझ गये होगे इस लिये वादे के अनुसार अपनी पोस्ट या आप कि किसी की भी टिपण्णियो का धन्यवाद भी नही कर पाया, लेकिन अब कोशिश रहेगी कि मै अपनी सारी पोस्ट समय पर कर सकूं

21 टिपण्णी:
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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
20 August 2009 at 8:19 PM  

अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभ कामनाएँ। आप को वहाँ बहुत बेहतर चिकित्सा सहायता औऱ सुविधा मिली है। भारत होता तो शायद अब तक डाक्टर आप की एंजियोग्राफी कर चुके होते। आप बिलकुल भी लापरवाही न बरतें। समय पर चिकित्सा मिलना बहुत बड़ी नेमत है।

अभी यदि ब्लागिंग न भी करें तो चलेगा, लेकिन आराम और चिकित्सा पूरी करें। हो सके तो छोटी छोटी मजाहिया पोस्टें लिखें। कृष्ण चंदर को दिल की बीमारी हुई तो उन्हें डाक्टरों ने गंभीर पढ़ने से मना कर दिया था। वे जाससी उपन्यास पढ़ते थे और डाक्टरों की अनुमति से उन्हों ने एक जासूसी उपन्यास उस चिकित्सा के दौरान लिख दिया।

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विनय ‘नज़र’ said...
20 August 2009 at 8:46 PM  

आपका सारा हाल जानकर थोड़ा दुख हुआ और आपका आत्मविश्वास देखकर दोगुनी ख़ुशी हुई। ईश्वर से आपके सुख और स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।
---
मानव मस्तिष्क पढ़ना संभव

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Dr. Mahesh Sinha said...
20 August 2009 at 8:53 PM  

पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें

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AlbelaKhatri.com said...
20 August 2009 at 9:07 PM  

raj bhai saaheb,
namaskaar

na blog kahin jaa raha hai na hum kahin jaa rahe hain ....
aap dr. ki baat poori maaniye aur please sab se pahle swasth ho jaaeeye.............
aap jaise hamaare bade bhai aswasth hon toh hum bhi khud ko swasth nahin maan rahe.........

poojya maataaji ka jaana atyant dukhad hai lekin is sacchaai ko ab aap sweekaar kar len ki ab ve sirf avchetan me hi aap k saath hain sthool roop se ab ve kabhi aap k maathe par haath nahin ferengi . isliye vishaad ko bhooliye , bhagwaan ki ichha me hi apni ichha maan lijiye aur tanaav va dukh se baahar nikaliye ........
aapkaa post padfh kar yon laga jaise ye sab hamaare hi saath ghat rahaa hai........
PLEASE.......VAAPIS APNI MASTI ME LAUTNE KA PRAYAS KAREN..

WISH YOU ALL THE VERY BEST.........DEAR BHAIJI....
G E T W E L L S O O N

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पुरुषोत्तम कुमार said...
20 August 2009 at 9:32 PM  

आप जल्द स्वस्थआप जल्द स्वस्थ हों, ऐसी कामना है. हों, ऐसी कामना है.

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शरद कोकास said...
20 August 2009 at 10:59 PM  

भाटिया जी धैर्य रखे । द्विवेदी जी ठीक कह रहे है । जो चिकित्सा वहाँ आपको मिल रही है वह यहाँ की v i p चिकित्सा से भी बेहतर है । आप पहले से भी ज़्यादा बेहतर हो जायेंगे फिर करेंगे मिल जुल कर ब्लॉगिंग-श्लोगिंग - शुभकामनाये -- शरद कोकास ,दुर्ग छत्तीसगढ भारत

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Arvind Mishra said...
21 August 2009 at 3:52 AM  

ओह तभी मैं सोच रहा था की भाटिया जी क्यों नहीं दिख रहे -आप अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें -ब्लागिंग थोड़ी कम भी कर दें तो चलेगा -मतलब ज्यादा स्ट्रेन न लें -डाकटर से भी स्पष्ट पूंछ लें की लैपटॉप पर कितनी देर काम कर सकते हैं ! और हाँ खून पतला होने की दवाईयों -वारफेरिन आदि का डोज ज्यादा होने पर खतरनाक साईड इफेक्ट हो सकते हैं इसके प्रति विशेष सावधानी बरते !

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पंकज सुबीर said...
21 August 2009 at 4:37 AM  

आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखें । ईश्‍वर से मेरी प्रार्थना है कि वो आपको स्‍वस्‍थ करे ।

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ताऊ रामपुरिया said...
21 August 2009 at 4:51 AM  

आपकी कुशल क्षेम जानकर बडी प्रश्न्नता हुई, इतने दिनो से कोई खबर ही नही थी. आप स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें. ईश्वर आपको जल्द से पुर्ण स्वस्थ करें य्हई शुभेच्छा.

रामराम.

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seema gupta said...
21 August 2009 at 5:39 AM  

आपकी तबियत के बारे में जान कर बडा ही दुःख हो रहा है.....इस मुश्किल घडी मे हम सभी आपके साथ हैं.....अपनी सेहत का ध्यान रखियेगा और डाक्टर की सलाह पर पूरी तरह गौर कीजियेगा. इश्वर से आपकी स्वास्थ्य लाभ की कामनाओ के साथ...

regards

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सुशील कुमार छौक्कर said...
21 August 2009 at 6:21 AM  

हम सोच रहे थे कुछ और पाया कुछ। खैर आप दवाई खाईए और जल्दी से स्वस्थ हो जाईए। वैसे रोहतक के गबरु जवान जल्दी से दोडने लगते है जी :) टेक केयर।

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अन्तर सोहिल said...
21 August 2009 at 7:38 AM  

आपकी अस्वस्थता की बात जानकर अच्छा नही लगा।
आपके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की परमात्मा से प्रार्थना और कामना करता हूं।

प्रणाम स्वीकार करें

"मेरी हल्की सी हरकत पर परियो सी सुंदर नर्स झट आ जाती थी"
"चलो जी अस्पताल के बहाने परीलोक भी घूम आये आप तो, दिल का दर्द तो हसीनाएं ही ठीक कर सकती हैं। हा हा हा"

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Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
21 August 2009 at 11:50 AM  

बहुत दिनों से मन में विचार आ रहे था कि भाटिया जी की खोज खबर नहीं मिल रही। माता जी के देहान्त के बाद यहाँ ब्लाग पर भी आपके साथ कुछ सम्पर्क नहीं हुआ।खैर ब्लागिंग वगैरह तो चलती रहेगी, आप अपने स्वास्थय की ओर ध्यान दें ओर भरपूर आराम करें।
आपके शीघ्र स्वास्थय लाभ हेतु शुभकामनाएँ!!!!

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समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...
21 August 2009 at 11:53 AM  

पढ़कर बड़ा दुःख हुआ . आप कृपया अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें .

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गिरिजेश राव said...
21 August 2009 at 12:21 PM  

जल्दी से अच्छे हो जाँय
। वहाँ चूल्हा मिलता हो (न मिले तो ऑर्डर देकर बनवा लें) तो कुछ दिनों के लिए ब्लॉगरी का शौक उसमें . . . बाद में फिर पाल लीजिएगा। शौक ऐसी चीज है जिसे जब चाहे पाला और जब चाहे निकाला जा सकता है। लेकिन आदमी का दिल और फेफड़ा तो बहुत कीमती हिते हैं। आराम करें। अधिन दिल पर लेने की भी जरूरत नहीं है। मुझे तो अभी से कोलेस्ट्रॉल और लीवर की प्रॉबल्म बताया जा रहा है। न मैं दारू पीता हूँ, तली हुई चीजें खाता नहीं, घी नहीं खाता . . मतलब ये सब ऐसे ही है। सावधानियाँ अवश्य रखें।

वैसे 'परियो सी सुंदर नर्स' और 'हसीन सी नर्स' शब्द बता रहे हैं कि आप वहाँ भी टीपने में लगे थे ;) मतलब दिल एकदम दुरुस्त है।

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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...
21 August 2009 at 2:47 PM  

मैं तो सोच रहा था कि माताजी के स्वर्गवास पर आप शायद भारत आये हुए होंगे। पर यहां तो बात ही कुछ और हुई हुयी थी। बड़ा ही कठिन समय था आपके और आपके परिवार के लिये।
अब अपना पूरा ख्याल रखें। हम सब की शुभकामनाएं आप सब के साथ हैं।

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mehek said...
21 August 2009 at 6:25 PM  

sir ji u just take care of ur health,jaldi swah ho yahi dua hai.

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mehek said...
21 August 2009 at 6:26 PM  

swah ki jagah swasth padhe,typing mistk ke liye kshama chahenge.

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dhiru singh {धीरू सिंह} said...
22 August 2009 at 6:20 AM  

शीघ्र स्वस्थ हो ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है

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राज भाटिय़ा said...
22 August 2009 at 9:19 PM  

आप सभी का दिल से धन्यवाद

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:51 AM  


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नमस्कार,आप सब का स्वागत हे, एक सुचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हे, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी हे तो माडरेशन चालू हे, ओर इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा,नयी पोस्ट पर कोई माडरेशन नही हे, आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये

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