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मां ओर बच्चे

.

मेरी प्यारी मां.


चलो घुमने चले..... मां संग


रे आज तो पापा भी हमारे साथ चल रहे है
चलो अब घर चले शाम होगई है, ओर हम सब थक भी गये है

8 टिपण्णी:
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Alag sa said...
13 December 2008 at 2:03 PM  

सुखी परिवार भी भगवान की नेमत है।

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संगीता पुरी said...
13 December 2008 at 2:30 PM  

बहुत सुंदर।

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समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...
13 December 2008 at 3:36 PM  

bahut sundar chitr man moh liya .dhanyawad.

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ताऊ रामपुरिया said...
13 December 2008 at 4:28 PM  

बहुत सुन्दर ! मन आनन्दित हो गया !
राम राम !

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विष्णु बैरागी said...
13 December 2008 at 4:47 PM  

बस ! देखते रहिए और आनन्‍द लेते रहिए । प्रकृति के ऐसे सुन्‍दर दृश्‍य अब इसी तरह से देखने को मिलेंगे ।
शुक्रिया ।

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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...
13 December 2008 at 4:52 PM  

आँखों को शीतलता मिल गयी इस परिवार की छटा देखकर। शुक्रिया।

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गौतम राजरिशी said...
13 December 2008 at 5:46 PM  

उस पिछले हृदय-विदारक तस्वीरों के बाद इन मन्मोहक चित्रावली ने दिल जीत लिया

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 6:29 AM  



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