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है राम कोई मेरी मदद तो करो

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अरे इस को अब अकल आई सारे बच्चो को खो कर!!! यार कोई तो मदद करो इस गरीव वत्तख की बेचारी अब सोच रही है.ओर छोटा सा बच्चा सहम के खडा है.


19 टिपण्णी:
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MANVINDER BHIMBER said...
10 December 2008 at 9:23 AM  

nice messege

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Mired Mirage said...
10 December 2008 at 10:01 AM  

ओह ! यह बात तो छोटी सी नहीं रह गई । बहुत भयंकर हो गई ! बेचारी बत्तख ! बेचारे बच्चे ! सीख यह मिलती है कि आँख बंद करके माँ के भी पीछे नहीं चला जा सकता ।
घुघूती बासूती

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आशीष कुमार 'अंशु' said...
10 December 2008 at 10:31 AM  

Bahoot Khoob....
Tasvir ne vah kahaa jise shabd naa kah paay.

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ताऊ रामपुरिया said...
10 December 2008 at 10:48 AM  

बहुत दुःख और अफसोसजनक घटना हुई ये तो ! शायद घुघूती बासूती जी की बात को ही दोहराना चाहूँगा !

रामराम !

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seema gupta said...
10 December 2008 at 11:59 AM  

"उफ़ दिल बहुत दुखी हुआ इस चित्र को देख कर... अब क्या करें इस बेचारी माँ के लिए.."

regards

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विष्णु बैरागी said...
10 December 2008 at 1:27 PM  

चित्र तो निस्‍सन्‍देह सुन्‍दर है किन्‍तु घटना और उसकी परिणती पीडादायक है ।

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Ratan Singh Shekhawat said...
10 December 2008 at 1:57 PM  

बहुत अफसोसजनक घटना

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रंजना [रंजू भाटिया] said...
10 December 2008 at 2:08 PM  

कोई तरीका सोचो बचाने का इन्हे ..बुरा है यह तो .

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सुशील कुमार छौक्कर said...
10 December 2008 at 2:24 PM  

बहुत बुरा हुआ जी बतख के साथ।

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Alag sa said...
10 December 2008 at 2:55 PM  

राज जी,
जिसने कैमरा थामा हुआ था उसने बचाने की कोशिश क्यूं नहीं की ?

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dhiru singh {धीरू सिंह} said...
10 December 2008 at 3:45 PM  

आज कल की फेशनेबल माँ के साथ भी ऐसा हो सकता है संभल कर चलो बच्चो के साथ

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गौतम राजरिशी said...
10 December 2008 at 4:12 PM  

क्या तस्वीरें सही हैं?..सच में कैमरे वाले ने बचाने की कोशिश की या नहीं?

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P.N. Subramanian said...
10 December 2008 at 5:59 PM  

तस्वीरें बहुत सुंदर हैं. दुख इस बात का है कि बच्चों के विश्वास पर आँच आ गयी.उनको क्या मालूम कि अम्मा को अकल भैंस के बराबर भी नहीं है.

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राज भाटिय़ा said...
10 December 2008 at 8:39 PM  

मुझे पता तो नही इन बच्चो का लेकिन जब हम ने यह चित्र देखा तो सब ने यही सोचा कि इस फ़ोटो ग्राफ़र ने जरुर इन्हे बचाया होगा, क्योकि जो गटर आप देख रहे है इस के अन्दर एक जाली होती है, जो कि इन छेदो के पास ही होती है, ओर इस मे हाथ आराम से चला जाता है पानी तो काफ़ी दुर होता है,इन मे काफ़ी बार लोगो की चाभी बगेरा गिर जाती है, दुसरा अगर ना निकले तो लोग पुलिस को फ़ोन कर देते है, यह बच्चे जरुर बच गये होगे, अगली बार इन की कुछ ओर मजेदार फ़ोटो दिखऊगा,

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विनय said...
10 December 2008 at 9:25 PM  

हाँ साहब जो मैक़े पर हो उसे बचाना चाहिए, आजकल लोग तो इंसानों को सड़क पर अधमरा छोड़ जाते हैं।

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Zakir Ali 'Rajneesh' said...
11 December 2008 at 6:13 AM  

सुन्‍दर चित्रकथा।

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mahashakti said...
12 December 2008 at 4:38 PM  

हम क्या कहे, बच्‍चे बच गये होगे तो बहुत अच्‍छा लगेगा।

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Dr.Bhawna said...
20 December 2008 at 9:11 AM  

अरे! मैं तो बहुत दुखी हो गई ये फोटो देखकर... काश वो बच्चे गये हों ...आज ही आपकी काफी सारी पोस्ट पढ़ीं...

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 6:29 AM  



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