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कुंदन लाल सहगल भाग २

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इक बंगला बने न्यारा.....
आईये आप को कुंदन लाल सहगल जी के कुछ ओर यादगार गीत सुनाये...... बस इन के गीतो को सुन कर मस्त ना हो जाये तो कहिये.....

तो चलिये आप को अपने न्यारे बंगले मै ले चले...

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11 टिपण्णी:
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seema gupta said...
15 November 2008 at 5:15 AM  

" bhut acche geet, Deewana hun maira manpasand geet hai, accha lga sun kr"

Regards

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ताऊ रामपुरिया said...
15 November 2008 at 6:44 AM  

बहुत आनंदम और मस्तम गाने ! बहुत धन्यवाद आपको !

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डॉ .अनुराग said...
15 November 2008 at 8:09 AM  

बहुत धन्यवाद ,मुकेश ने शुरू में उन्ही के अंदाज की कॉपी की थी

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कुन्नू सिंह said...
15 November 2008 at 8:50 AM  

ईतना पूराना गाना। वैसे मूझे हिस्ट्री बहुत बढीया लगता है।

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शोभा said...
15 November 2008 at 11:41 AM  

बहुत सुन्दर गीत सुनवाए हैं आपने। आनन्द आगया। आभार।

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निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...
15 November 2008 at 3:45 PM  

Ek bungala bane pyara ....
bahut purana gana hai sunakar aaj bhi tabiyat khush ho jati hai.
anand aa gaya . dhanyawaad. Abhaar raj ji .

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गौतम राजरिशी said...
16 November 2008 at 8:44 AM  

बहुत सुंदर भाटिया साब....
घर वाले चकित से थे,क्योंकि मेरे कमप्युटर से अक्सर रफी,किशोर,लता या फिर मेहदी,गुलाम अली और जगजीत की ही आवाज आती थी...

पिताजी खासकर विस्मृत से थे

थैंक्यु सर

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mehek said...
16 November 2008 at 6:24 PM  

purana sundar gana sunwane ke liye shukran.

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jayaka said...
17 November 2008 at 9:30 AM  

yeh apane jamaane ka ek prasiddh song tha!.... bhi isaka aaj bhi luft uthhaya jaata hai!....bahut achchha lagaa!

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Zakir Ali 'Rajneesh' said...
17 November 2008 at 9:41 AM  

कुंदन जी के फैन के लिए आपने बहुत पुण्य का काम किया है, शुक्रिया।

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 6:42 AM  


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