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कुंदल लाल सहगल भाग १

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आईये आप को कुंदल लाल सहगल के भुले विसरे गीत सुनाऊ.... इन गीतो मे आज का शोर नही , लेकिन इन्हे सुन कर मस्ती सी छा जाती है, पहले पये दान मै मेने दस गीत ही रखै है, आप सुने ओर जरुर बताये केसे लगे.......

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10 टिपण्णी:
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ताऊ रामपुरिया said...
8 November 2008 at 4:20 PM  

आहा हां आनंद आया गया ! बहुत धन्यवाद !

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Vikhandan said...
8 November 2008 at 4:30 PM  

बहूत जी क्योकी अभी कुछ दिन पहले हम एक म्यूजिक दुकान पर के. ल. सहगल की कोई अल्बम माँगने की गलीत कर बैठे । अल्बम तो नही मिली पर उसने आँखे तरेर कर जरुर देखा ।

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mehek said...
8 November 2008 at 4:34 PM  

waah purane madhur geet hamesha dil ko achhe lagte hai shukran

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sahil said...
8 November 2008 at 4:40 PM  

thanx sir ji,
ALOK SINGH "SAHIL"

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Udan Tashtari said...
8 November 2008 at 5:33 PM  

वाह वाझ!! बड़े दिन बाद बाबुल मोरा इत्मिनान से सुना. आनन्द आ गया.

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जितेन्द़ भगत said...
8 November 2008 at 7:25 PM  

nice collection sir ji.

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गौतम राजरिशी said...
8 November 2008 at 10:35 PM  

पहले तो इन गीतों के लिये धन्यवाद.एक को छोड़ "कतिबे-तकदीर..." शेष तो हैं मेरे पास.तो इसे सेव करने का उपाय?
और दूजा ये कि मेरी गज़ल पढ़ी,आपको पसंद आयी,तारिफ़ की आपने और फिर सस्पेंस बना कर चले गये.वो कौन सी कहानी याद आयी?अगला पोस्ट बन सकता है ये....

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Manish Kumar said...
9 November 2008 at 6:00 AM  

shukriya is prastuti ka...

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भवेश झा said...
9 November 2008 at 2:46 PM  

vah sir bahot badhiya, har bar ki tarah kafi majedar or shabdon ke jadugar to aap hai hi. dhnyabad

or mafi chahunga mai bina ijajat ke chhutti par gaon chala gaya. dhnyabad

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 6:46 AM  


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