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भारत की प्रसिद्ध मस्जिदो की सुची

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मुझे मेरे एक लेख पर दो टिपण्णीयां मिली थी, जिन का जबाब मै जल्द ना दे सका, माफ़ी चाहता हूं पहली टिपण्णी श्री मान दिलीप कवठेकर जी की थी, ओर इन की टिपण्णी से सहमत थे श्रीमान पलिअकरा जी, आज समय मिला , ओर मेने फ़िर से अध्यन कर के यह सब खोजा ...पहले आप की टिपण्णी फ़िर उन का जबाब.

दिलीप कवठेकर जी ,जहाँ तक मेरी जानकारी है, भोपाल की ताज-उल-मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है. नापी नहीं , मगर दोनों विजीट कर चुकां हूँ , अंदाज़ से भी ताज-उल-मस्जिद बड़ी लगती है. कृपया एक बार फ़िर देखें और तसल्ली कर सकते है, क्योंकि हमने अपने बालपन में भोपाल में स्कूल में पढ़ते हुए तो हीसुना था, हो सकता है, सही ना हो.



पलिअकरा जी, दिलीप कवठेकर जी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं. एक पोस्ट और सही. लिखते रहिए. आभार.

**************

दिलीप कवठेकर जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद, आप की बात कुछ हद तक सही है, ओर मै पुरी जानकारी फ़िर से दे रहा हुं, कोई गलती हो तो जरुर सुधारे, आप का धन्यवाद

भारत की प्रसिद्ध मस्जिदो की सुची

१,जामा मस्जिद, यह मस्जिद दिल्ली मै स्थित है, ओर भारत की विशालतम( सब से बडी , ऊची नही)मस्जिद है, इस शहजहाम ने बनबाया था,इस मस्जिद को बनबाने मै करीब ६ साल लगे थे, ओर अरबो रुपये का खर्च हुआ था, यह रेतीले ओर सफ़ेद पत्थरो से बनी है, ओर इस के उत्तर ओर दक्षिण की ओर दो दुवार ही इस की विशेषता है,



२. ताज उल मस्जिद...

भारत की सब से ऊंची मस्जिद है ताज उल मस्जिद, भोपाल मै स्थित, इसका प्रवेश दुवार गुलाबी रंग का है, इस दुवार के उपर दो सफ़ेद गुंबद बने हुये है, यह गुंबद ऊपर की ओर है जेसाकी बाकी होते है, लेकिन इन की विशेषता है कि यह माना जाता है कि यह खुदा की ओर जाने का रास्ता है,पेसे के अभाव से काफ़ी समय इस का निर्माण रुका रहा था, लेकिन १९७१ मै यह मस्जिद पुरी तरह से बनी, ओर इस मे बच्चो के लिये मदरसा भी है.




३.कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद...
यह मस्जिद भी दिल्ली मै है,इसे कुतुबद्दीन ऎबक ने ११९२ मे बनवाना आरंभ किया, लेकिन कुतुबद्दीन के बाद इसे इल्तुतमिश नै १२३० मै फ़िर अलाउद्दीन खिलजी ने१३१५ मै पुरा करवाया, यह इस्लामिक कला कारी का बेजोड नमूना है,इस मस्जिद मै राय पिथोडा स्थित कई हिन्दु मंदिरो के स्तंभ लागये गये है, इस कारण इस मस्जिद मै हिन्दु कला की छाप भी मिलती है,

आप जेसे जेसे इस मस्जिद मै प्रवेश करते है, आप का ध्यान बरबस ही इस की गोलाकार छतो पर जाता है, इस के निर्माण मै बढोतरी करते हुये कुतुबद्दीन के दामद ने मस्जिद के तीन मेहराबो को बढा कर पांच कर दिया, जहा नमाज अदा की जाती है,इमाम जमीम सिकंदर लोदी उस समय धर्म गुरु थे मुस्लमानो के, उन का मकबरा भी बहुत हि सुन्दर बना है यहां पर.

४. मोती मस्जिद
सफ़ेद पत्थरो से निर्मित यह मस्जिद १८६० मे सिंकदर जहां बेगम ने बनवाई थी, यह भोपाल मे स्थित है, ओर बहुत ही सुन्दर कारीगरी की गई है.

५. अढाई-दिन का झोपडा...
इस मस्जिद को बनबाने मे कहते है सिर्फ़ ढाई दिन ही लगे, ओर यह मस्जिद अजमेर मै बनी है,इस से कई बातें प्रचलित है, ओर अब अर साल यहा (ढाई) अढाई दिन का मेला लगता , इस का नाम इस के निर्माण के कारण ही अढाई दिन का झोपडा पडा है,यहां पहले बहुत बडा संस्कृत का बिद्धालया था, ११९८ मे मोहम्म्द गोरी ने उस पाठशाला को इस मस्जिद मै बदल दिया, ओर इस का निर्माण थोडा सा फ़िर से करवाया,ओर अबु बकर ने इस का नकशा तेयार किया था, मस्जिद का अन्दर का हिस्सा मस्जिद से अलग किसी मंदिर की तरह से लगता है.

५.जमाली कमाली मकबरा...
इस मस्जिद का निर्माण सिकंद्र लोदी के समय १५२८ ईस्वी मे शुरु हुआ था ओर हुमाऊ के समय१५३६ मै पुरा हुआ,, जमाली एक सुफ़ी संत थे ओर वह सिकंदर के दरवार मै थे, ओर काफ़ी समय बाद वह हुमाऊ के समय मोत को मिलेयह मकबरा मस्जिद के पिछले हिस्से मै बना है,लेकिन इस की दिवारे ओर छत बहुत ही सुन्दर है, ओर इस मस्जिद की मरम्मत अभी हुयी है

६. जामी मस्जिद
यह अजमेर मे है इसे शाहजहां का मस्जिद भी कहते है, यह मस्जिद करीब ४५ मीटर लम्बी है, ओर इस की ११ मेहराबै है ओर इस का पत्थर मकराना से मगंवाये गये थे.


22 टिपण्णी:
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Gyandutt Pandey said...
21 October 2008 at 4:05 AM  

अच्छी जानकारी।

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श्रीकांत पाराशर said...
21 October 2008 at 4:49 AM  

Achhi jankari ke liye dhanywad.

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ताऊ रामपुरिया said...
21 October 2008 at 6:11 AM  

बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी ! धन्यवाद !

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seema gupta said...
21 October 2008 at 6:28 AM  

"wah, hume to ek doo ke hee naam ptta thy, aaj bake ke bhee pttaa chul gye, thanks for sharing"

Regards

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Paliakara said...
21 October 2008 at 7:19 AM  

भाटिय़ा जी, आभार. वैसे भारत की सबसे छोटी मस्ज़िद भी भोपाल में ही है.
http://mallar.wordpress.com

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mamta said...
21 October 2008 at 7:35 AM  

राज जी बहुत ही ज्ञानवर्धक जानकारी देने का शुक्रिया । हिस्ट्री मे पढ़ा था ।

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डॉ .अनुराग said...
21 October 2008 at 9:01 AM  

ज्ञानवर्धक जानकारी !

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रश्मि प्रभा said...
21 October 2008 at 9:31 AM  

यहाँ आकर एक वृहद् जानकारी पाना,
बहुत अच्छा लगता है.........

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अभिषेक ओझा said...
21 October 2008 at 10:48 AM  

अच्छी जानकारी.

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दीपक said...
21 October 2008 at 12:35 PM  

शानदार जानकारी भाटिया जी !!हमे तो भारत की सबसे बडी मस्जिद के बारे मे भी आप से ही पता चला !!आभार

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Zakir Ali 'Rajneesh' said...
21 October 2008 at 12:36 PM  

आप की पोस्ट दुनिया जहान में सबसे अलग होती है। मैं आपकी इस खोजी वृत्ति को सलाम करता हूं।

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रंजना said...
21 October 2008 at 3:02 PM  

इतने जानकारीपरक पोस्ट के लिए बहुत बहुत आभार.यह सब हमें नही पता था.

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सचिन मिश्रा said...
21 October 2008 at 3:47 PM  

Jankari ke liye aabhar.

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शहरोज़ said...
21 October 2008 at 6:53 PM  

aabhar jaankari ke liye.

yun samay mile to ise aur vistrit roop mein likhen kai mashhoor masjiden chhot gayi hain.
isi silsile me khyaat mandir-math aur church-grudwaare ki bhi jaankari de saken to aapka ye kaam bahut hi sangrahniy ho jayega.

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समीर यादव said...
21 October 2008 at 8:42 PM  

अच्छी जानकारी...शुक्रिया.

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प्रहार - महेंद्र मिश्रा said...
22 October 2008 at 6:20 AM  

ज्ञानवर्धक जानकारी ...

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कुन्नू सिंह said...
22 October 2008 at 7:58 PM  

बहुत बढीया जानकारी है। क्यो की जब काम पडता है तो खोजने मे 2-3 घंटे लग जाते हैं।

और अब तो एक ही जगह पर जानकारी मील जाएगा।

एक ध्नयवाद, मैने अभी एक दो दीन पहले कंप्यूटर फार्मेट मारा था। और Flash ईंस्टाल करना भूल गया था। और जैसे ही परायादेश पर गया वहां लीख दीया।

आपके ब्राउजर के पास फ्लैस नही है। और जल्दी से ईंस्टाल कर लीया।

एक बार और ध्नयवाद।

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जगदीश त्रिपाठी said...
22 October 2008 at 8:58 PM  

अच्छी जानकारी है। भइया मंदिरों के बारे में भी इसी तरह का एक चिट्ठा लिख दो। साथ ही मेरा न्योता भी ले लो।

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jayaka said...
23 October 2008 at 8:17 AM  

ek aavashyak aur upayukt jaankaari di hai aapane!....dhanyawad!

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सौरभ पंडित said...
23 October 2008 at 5:43 PM  

अच्छी जानकारी। अब इससे ज्यादा क्या लिखें। वह कहते हैं न कि लिखना कम समझना ज्यादा।आपको धन्यवाद।

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भवेश झा said...
24 October 2008 at 5:59 PM  

deri se comment ke liye maafi chahta hun, bahot hi achhi jaankari hai, dhnyabad

दीवाली ki dher sari shubhkamanayen.

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 6:51 AM  


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