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कुछ सब से जुदा

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मियां बीबी समुन्दर के किनारे घुम रहे हे....
बीबी, जी इसे बीच क्यो कहते हे ?
मियां, अरे तुम्हे नही पता,? बात यह हे की यह जमीन ओर आसमान के बीच मे हे ना इस लिये इसे बीच कहते हे।

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हंसी के लिये गम कुरबान....
खुशी के लिये आंसु कुरबान,
दोस्त के लिये जान कुरबान,
ओर आज के जमाने मे
अगर दोस्त की गर्ल फ़्रेन्ड मिल जाये



तो साला दोस्त भी उस पर कुरबान


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एक बार अमृतसर स्टेशन पर बहुत ही बडी दुर्घटना घट गई, ट्रेन ने नीचे बहुत से लोग आ गये बस एक सरदार जी बचे, अब रिपोर्टर उन सरदार जी से तरह तरह के सवाल पुछ रहे हे, वही इक्लोते बचे थे इस दुर्घटना मे जिन्दा, ओर आंखो देखा हाल सुना रहे थे....
एक रिपोर्टर अच्छा सरदार जी आप बतायेगे यह सब अचानक केसे हो गया ?
सरदार जी , ओये जी होना क्या था, अचानक आंउसमेन्ट हुई की दिल्ली जाने बाली ट्रेन प्लेट फ़ार्म दो पर आ रही हे, तो सारे लोग झट से पटरियो पर कुद गये ओर तभी पटरियो पर ट्रेन आ गई ओर सब नीचे आगये,
रिपोर्टर, फ़िर आप केसे बच गये ? लगता हे आप समझ दार थे जो कुदे नही !!!!!
सरदार जी, ओये जी नही मे तो आत्महत्या करने आया था जब मेने सुना कि ट्रेन प्लेट्फ़ार्म पर रही हे तो मे झट से प्लेटफ़ार्म पर आगया था????

15 टिपण्णी:
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Anil Pusadkar said...
11 October 2008 at 5:31 AM  

वाह भाटिया जी वाह, मजा आ गया।

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seema gupta said...
11 October 2008 at 5:44 AM  

हंसी के लिये गम कुरबान....
खुशी के लिये आंसु कुरबान,
दोस्त के लिये जान कुरबान,
ओर आज के जमाने मे
अगर दोस्त की गर्ल फ़्रेन्ड मिल जाये
तो साला दोस्त भी उस पर कुरबान

'ha ha ha ha ha haha ha hansee nahee ruk rhee ab kya krun ...'

regards

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ताऊ रामपुरिया said...
11 October 2008 at 6:37 AM  

बहुत धन्यवाद ! काफी दिनों बाद ५ स्टार चुटकले आए हैं आपकी दूकान में ! मजा आया !

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rakhshanda said...
11 October 2008 at 7:02 AM  

वाह, राज जी, आप ने ये बड़ा अच्छा काम किया, लबों पर मुस्कराहट लाना बड़ा ही नेक काम है और इसके लिए आपका बेहद शुक्रिया...

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श्रीकांत पाराशर said...
11 October 2008 at 7:15 AM  

Wah bhatiaji, gajab laye aapto. maza aa gaye. hansgulle hon to aise, wah.

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भूतनाथ said...
11 October 2008 at 10:07 AM  

सर जी चुटकले पढ़ते २ तो मेरे मुंह में पानी आगया ! धन्यवाद !

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दीपक "तिवारी साहब" said...
11 October 2008 at 10:10 AM  

तो साला दोस्त भी उस पर कुरबान

है तो चुटकला ही, पर हकीकत भी है ! बहुत मजा आया !

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अशोक पाण्डेय said...
11 October 2008 at 2:49 PM  

वाह.. बहुत अच्‍छे चुटकुले हैं..सरदार जी वाला चुटकुला तो और भी मजेदार है। धन्‍यवाद।

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सचिन मिश्रा said...
11 October 2008 at 4:05 PM  

Bahut badiya.

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pallavi trivedi said...
11 October 2008 at 5:27 PM  

मज़ेदार चुटकुले हैं...

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भवेश झा said...
11 October 2008 at 7:53 PM  

ha a ha, bahot khub sir, dhnyabad

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योगेन्द्र मौदगिल said...
12 October 2008 at 11:03 AM  

लगता है ताऊ ने ४ लट्ठ का आर्डर भेज दिया जो आपने ४ दरवाजे बताये पर खुल्या एक वो भी टाइप करकै खोलना पड्या पहले तो आप जहां टिप्पणी देते थे वहीं आपकी फोटो पै माउस धरते ही खुल जाया करता था
अब जोर लगाना पड़ता है

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समीर यादव said...
12 October 2008 at 10:01 PM  

शुक्रिया भाटिया जी, विविधता तो जीवन की पूंजी है. आज के समय में आपने निश्छल हँसी दे दी, क्या बात है.

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Zakir Ali 'Rajneesh' said...
13 October 2008 at 10:00 AM  

बहुत जबरदस्त चुटकुले हैं।
आपके लिए मेरा यह कमेण्ट भी कुर्बान।

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 6:55 AM  


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