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गोल गपे

.

बीबी अपने पति से, एक बात बोलू मारोगे तो नही.....
पति , अरे केसी बात करती हॊ बोलो...
बीबी, मै मां बनाने वाली हूं.....
पति, अरे इस मे मारने वाली क्या बात हे यह तो खुशी की बात हे....
बीबी, हां लेकिन एक बार जब मे कालिज मे थी ओर यह बात पापा को बोली थी तो....पापा ने बहुत मारा था।
*****************************************************
ताऊ, बचपन मे मां की बात सुनी होती तो .... यह दिन ना देखना पडता!!!!!
तिवारी, क्या कहती थी तुम्हारी मां ???
ताऊ, अरे बाउली बुच जब बात सुनी ही नही तो मुझे क्या पता मां क्या कहती थी।
*********************************************************
बीबी , सुनो जी ड्रा० ने मुझे एक महीना किसी हिल स्टेशन पर जाने को कहा हे, पुरा एक महीना....ओर हम कहा जायेगे ?
पति, दुसरे ड्रा० के पास।
************************************************************
संता होटल मे जा कर एक मच्छ्ली खाने के लिये आर्डर करता हे, थोडी देर मे वेयर आता हे... सर आप फ़ेंच मच्छी लेगे या स्पेनिश ??
संता, ओये यार कोई सी भी ले आ मेने कोन सी उस से बातें करनी हे.

10 टिपण्णी:
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सचिन मिश्रा said...
26 September 2008 at 10:19 PM  

Bahut khub.

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भूतनाथ said...
27 September 2008 at 6:21 AM  

बहुत जोरदार गोल गप्पे खिलाये आपने ! बुखार के बाद मेरा मुंह का
स्वाद भी ख़राब चल रहा है ! और ये ताऊ और तिवारी साहब मुझे
परेशान कर रहे हैं ! ज़रा समझा लो इनको ! :)

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भूतनाथ said...
27 September 2008 at 6:22 AM  

बहुत जोरदार गोल गप्पे खिलाये आपने ! बुखार के बाद मेरा मुंह का
स्वाद भी ख़राब चल रहा है ! और ये ताऊ और तिवारी साहब मुझे
परेशान कर रहे हैं ! ज़रा समझा लो इनको ! :)

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दीपक "तिवारी साहब" said...
27 September 2008 at 6:25 AM  

बेहतरीन गोल गप्पे हैं जी भाटिया साहब ! ये ताऊ है ही
ऐसा ! किसी बुजुर्ग की मानी होती तो इतना थोड़ी बिगड़ता ?
एक बात बताओ आप तो , क्या सारे हरयाणवी ऐसे ही हौवें सें ? :)

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ताऊ रामपुरिया said...
27 September 2008 at 6:28 AM  

बहुत ही जोरदार हैं ! मजा आ गया आज तो !
सही में माँ की मान लेता तो ताऊ फ़िर ताऊ क्यूँ कर बनता ? :)

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Zakir Ali 'Rajneesh' said...
27 September 2008 at 11:34 AM  

बहुतै बढिया। पर एम्मे पहिला वाला ज्यादा जोरदार बा।

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अशोक पाण्डेय said...
27 September 2008 at 7:19 PM  

वाह भैया, बहुत जायकेदार गोलगप्‍पे हैं। एकाध दिन और खिलाइए, भूतनाथ जी के मुंह का स्‍वाद फिर से बढि़या हो जाए।

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अशोक पाण्डेय said...
27 September 2008 at 7:20 PM  

:)

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योगेन्द्र मौदगिल said...
28 September 2008 at 2:02 PM  

वाह वाह...
भाटिया जी,
आपके गोलगप्पों में भूतनाथ को ठीक करने की पूरी क्षमता है.
जय हो...........

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 7:06 AM  


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