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क्या मे आत्मह्त्या कर लू ?? अन्तिम भाग

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आप ने पहले भाग मे जो पढा हे उस से आगे ....
पिछले दो सप्तहा केसे बीत गये पता ही नही चला, सब से ज्यादा खुशी मां को थी, लेकिन पिता जी भी कम खुश नही थे, आने जाने वाले सभी कहते थे कि चंदु की मां अब तो तुम ओर भी सुन्दर लगने लगी हो, तो कोई कहता, चंदु के पिता जी तो अब जवान लगते हे, घर मे खुशिया ही खुशियां, दुखी थे तो मेरे मित्र, क्योकि मेने अब उन के पास जाना बहुत कम कर दिया था, दफ़तर से सीधा घर, फ़िर शाम को घुमने जाना, मां अपनी पसंद से नयी नयी साडियां गहने देती , ओर बाहर जाने से पहले पता नही केसे केसे टोटके करती, कभी कान के पीछे काला रंग लगा देती तो कभी कुछ।

फ़िर हम दोनो कुछ दिनो के लिये गोवा घुमने गये, वहां हम १५,२० दिन के करीब रहे खुब मस्ती की, मे खुद पर हेरान था, मेरे जेसा चुप रहने वाला लडका अब नटखट बन गया था, अरे मे अपनी दुल्हनिया का नाम तो बताना ही भुल गया, मेरी उन का नाम पुनम (कलप्नित नाम) हे, मेरी तरह से पुनम भी बहुत ही खुश थी,हम लोगो ने यहां खुब खरिदारी की, कुछ समान मां के लिये तो कुछ समान पिता जी के लिये भी हम दोनो ने अपनी दोनो की पंसद का लिया ओर, फ़िर एक दिन घर वापिस चल पडे।

घर पर मां ओर पिता जी बहुत ही बेचेनी से हमारा इन्तजार कर रहे थे, शाम को दीदी भी बच्चो के साथ गई( इस बीच मे अपनी ससुराल मे एक बार पुनम के साथ एक दिन रह आया था) दुसरे दिन मेरी मां दीदी ओर पुनम बाजार गये ओर वहां से कुछ गहने, ओर साडियां खारीद लाये, अगले दिन एक रस्म होती हे जिस मे नयी दुलहन को रासॊई मे जाना पडता हे, फ़िर उस के बाद वह किसी भी समय रसोई मे जा सकती हे, फ़िर दुसरे दिन यह रस्म भी पुरी हो गई, ओर मेरी दीदी , मां ओर पिता जी ने पुनम को आशीवाद दिया ओर बहुत से उपहार भी दिये, साथ मे मां ओर पिता जी ने कहा की तुम इस घर मे बहु बन कर नही मेरी बेटी बन कर रहना।

कुछ दिन सब ठीक ठाक चला, एक दिन पुनम का भाई उसे लेने आया तो मेने एक दम से मना कर दिया, लेकिन मां ओर पिता जी के सामने मेरी एक ना चली, ओर पुनम भी अनमने मन से मायके चली गई, उस दिन घर मे किसी ने भी ढग से खाना नही खाया।

कई बार फ़ोन किया तो हर बार मेरी सास यही कहती बेटा थोडे दिन ओर रुक जाओ, फ़िर एक महीना बीत गया तो मॆ मां ओर पिता जी की इजाजत ले कर एक दम से ससुराल मे पहुच गया, मुझे अचानक देख कर सभी पहले तो हेरान हुये, फ़िर खुश भी हुये, दुसरे दिन मे पुनम को ले कर घर गया, ओर फ़िर से जिन्दगी वेसे ही चल पडी,एक साल बीत गया मेरी शादी को, इस बीच एक दो बार पुनम अपने मायके हो आई थी,लेकिन जब भी गई कुछ बदली बदली लगती थी, हम सब ने सोचा शायद अपने मां बाप के लिये उदास हो गई हे

इसी बीच मां ने एक दिन बताया की मे दादी बनने वाली हु,फ़िर क्या था पुनम का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखा जाने लगा,ओर ठीक समय पर हमारे घर पर नया मेम्बर गया यानि मेरा बेटा, सभी बहुत खुश थे, नाना नानी भी आये ,फ़िर अगले साल एक कन्या ने जनम लिया, सो मां ओर पिता जी की खुशी का अन्त नही था ,
इसी तरह से मेरी शादी को तीन साल बीत गये ओर खुशियो मे जेसे हम गम नाम को भुल ही गये,लेकिन पुनम अब पहले जेसी नही रही थी, काफ़ी चिड चिडी ओर बात बात मे गुस्सा करने लगी थी,मुझे मां कहती थी बेटा बच्चे छोटे हे इस लिये थोडे दिनो मे अपने आप ठीक हो जाये गी, लेकिन अब पुनम ठीक होने के वजायए ओर भी बदजुबान होती जा रही थी।

फ़िर एक दिन मुझे बोली आप अलग मकान क्यो नही ले लेते, मेरा यहां दम घुटाता हे, मेने पुछा क्या मां या पिता जी ने तुम्हे कुछ कहा हे, तो बोली नही ... ओर मेने उसे समझाया देखो आईंदा ऎसा विचार भी मन मे मत लाना, मे अकेला ही इन का सहारा हू, ओर मे सपने मे भी नही सोच सकता।

फ़िर समय बीतता रहा, अब मेरी शादी कॊ पांच साल हो गये थे, ओर मेरा घर पुरी तरहा से नरक बन चुका था, पुनम मेरे समझाने से ठीक हो जाती , मायके जाती तो दुसरे दिन ही घर मे आते लडने लगती,
अब बच्चे भी सब देखते ओर सहम जाते। मेने अभी तक पुनम से बहुत ही प्यार से बात की , उसे सब तरह से समझाया, एक दिन दोपहर को घर आया तो देखा पुनम अपने कमरे मे आरम से सो रही हे, ओर मां घर मे फ़र्श साफ़ कर रही हे,इस के बाद कई बार ऎसा देखा ओर फ़िर मेने पुनम को प्यार से समझाया तो मेरी बात सुने बिना बोली मुझे नोकरानी बना कर लाये हो कया, जब मेरा अपना घर होग तो देखा जाये गा,

फ़िर एक साल से पुनम ने मां ओर पिता जी को भी बद जुबान से बद जबाब देने शुरु कर दिये, एक दिन इसी कारण पिता जी को दिल का दोरा पडगया, ओर मेरी मां का चेहरा देख कर लगता हे की कोई सॊ साल की बुढिया हे, ओर अब पुनम ना तो बच्चो को समभालती हे, ना ही घर का कोई काम, एक दिन तो हद हो गई, उस के भाई ओर पिता जी एक थाने दार के साथ आये ओर धमकी दे गये की अगर मेरी बेटी को कोई दुख दिया तो सब को जेल मे भेज दुगां

एक दिन जब मे पुनम को समझा रहा था तो वह जोर जोर से बोलने लगी, फ़िर अपने ऊपर मिठ्ठी का तेल डाल कर बोली मे तो मरुगी तुम सब को भी जेल मे चक्की पिसवाऊगी उमर भर, ओर अब यह हाल हे कोई भी पडोसी हमारे यहां नही आता, अगर कोई भुल से आ जाये तो अपनी बेज्जती पुनम से करवा कर जाता हे।
बहुत समझाया, लेकिन मेरे समझाने को शायद मेरी या मेरे मां ओर पिता जी की कमजोरी समझती हे,मां ओर पिता जी नही चाहते उसे तालक दु, मे भी नही चाहता, लेकिन घर जाता हु तो लगता हे किसी नरक मे आ गया, करु ओ कया करू, दिल करता हे जहर खा कर मर जाऊ, साथ मे मां ओर पिता जी ओर बच्चो को भी जहर दे दु, समझ मे नही आता मेरी खुशियो मे किस की नजर लगी, मां ओर पिता जी से अलग हो जाऊ तो इस उमर मे वो क्या करे गे, किस के सहारे रहे गे, मे मां बाप को भी नही छोड सकता, मुझे एक ही रास्ता दिखता हे आत्म हत्या, लेकिन पिता जी के असुल सामने आते हे , अब तो नोकरी भी मुस्किल लगती हे रोजाना वहां भी गल्तिया हो रही हे,
आप कोई अच्छी सलाह दे सके तो आप सब की मेहर बाणी हो गी

मेने आज तक पुनम पर कभी हाथ नही उठाया,उसे कभी गाली नही दी, क्या मेरी पुनम बदल गई हे????

9 टिपण्णी:
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G M Rajesh said...
6 September 2008 at 8:28 AM  

kai ghron men poonam mil jayengi
kuchh khud pareshaani se mar jaayengi
kuchh dusron ke liye pareshaani banengi
ghar sabhi kaa hai hasrate kaabu me rakhnaa insaan seekh nahi pataa
vajah hai kamaane ki shikshaa ne naitik dharm ko kahin dubo diyaa hai.

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G M Rajesh said...
6 September 2008 at 8:31 AM  

blog ke dash board page par icon hai language ke liye try kar dekhen shaayad aap ka setting language change ho jaaye
ya fir
settings me language ke liye koi nayaa ID kholkar pataa kar le ki samasya ki jad kahan hai

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रश्मि प्रभा said...
6 September 2008 at 9:03 AM  

jeevan mitana hai deewanapan
koi pyaar jeevan se pyaara nahin......
jab tak hum samaaj,pariwaar ke khyaal se ya apne sneh ki kamzori se chup rahte hain to samnewala najaayaz faida uthaata hai to sahi faisla lene ke liye ektarfa bhawna ko alag karen,aur tab faisla len..........aatmhatya - kyun?

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ताऊ रामपुरिया said...
6 September 2008 at 11:14 AM  

भाटिया साहब , चंदुलाल जी समस्या हर एक दो घरो के बाद तीसरे घर की समस्या है ! वैसे चंदुलाल जी बड़े संयम से काम ले रहे हैं अभी तक ! और यही समस्या मेरे एक नजदीकी की है ! और उन भाई ने वैवाहिक जीवन को २० साल निभा भी लिया ! बच्चे बड़े हो गए हैं! समस्या ज्यों की त्यों है ! और इस केस में चंदू जी के उल्ट खूब मार पिटाई भी हो चुकी है ! पर इससे समस्या और बढ़ती चली गई ! और इन सज्जन के पिता की मृत्यु हार्ट अटेक से हो चुकी है ! तो मेरे परिचित ने ये किया की किसी तरह सुबह उठ कर घर से बाहर चले जाते हैं ! और खेत खलिहान का काम करके देर से घर आकर सो जाते हैं ! उनकी पत्नी अपना रौद्र रूप जैसा उसका मूड हो ! उस हिसाब से रखती है ! कुछ भी सुधार नही है ! मेरी इनसे गहरी पहचान है ! सो इन्होने बताया की अब क्या तो तलाक लूँ ? बच्चे बड़े हो गए हैं ! और ससुराल वालों ने ही उनकी बीबी को भड़का कर ये हालत कर दिए हैं !

चंदुलाल जी चुकी नौकरी भी करते हैं तो उनका तनाव , माता पिता , बच्चे सब की हालत देखते हुए यह बड़ा मुश्किल है की कोई भी फैसला एकदम से ले लिया जाय ! हालत बहुत ही नाजुक हैं ! और हमें चंदू जी से पुरी सहानुभूती है ! मुझे ऐसा लगता है की इस सब में उनकी ससुराल वालों का भी हाथ है ! पत्नी को समझा चुके हैं ! फ़िर शान्ति से बैठ कर भला
बुरा समझाये ! यदि किस्मत से मान जाए तो ! रहा सवाल तलाक का तो इस बारे में सबकी अपनी अपनी सोच है ! अगर सहमती से हो और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके तो इस लाइन पर भी जा सकते हैं ! अगर पत्नी की सहमती नही रही तो बाकी उम्र कोर्ट कचहरी में निकल जायेगी !

मैं एक अन्तिम सलाह देना चाहूँगा की " बीबी यानी पूनम की अलग रहने की इच्छा है ! और ये इकलोते हैं , माँ-बाप कहाँ जायेंगे ? ठीक है !
मेरे मन में एक सवाल और है ! मेरा सवाल ध्यान से सुनिए ! शायद इसी सवाल में इनका जवाब छुपा हो ! चंदू जी कहते हैं की इनके माँ-बाप ने बहु (पूनम) के साथ बहुत अच्छा व्यवहार रखा है ! कहीं ऐसा तो नही है
की किसी समय इन्होने पूनम को या उसके मायके वालों को कुछ जली कटी सुनाई हो ! क्योंकि ऐसा सम्भव नही लगता की ऐसा ना हुवा हो ! आप उनसे पूछकर देखिये ! कुछ गाँठ जरुर है ! ऐसा हो नही सकता की बेबात कोई बात हो ! और इन्ही सब बातों के चलते बहु के मायके वाले भी पूर्वाग्रह से पीडित हों ? और आज भी हमारे भारतीय माहोल में सास कुछ ज्यादा ही तेज चलती है ! और ये सब उसीका नतीजा हो ? क्योंकि मुझे कुछ तो भी गड़बड़ सास ससुर (चंदू के माँ-बाप) की तरफ़ से
लग रही है ! इस केस में ना तो पोस्ट मेरिटल संबंधो की समस्या है ! ना ही कोई सेसुअलिटी से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कोई समस्या दिख रही है ! यानी चंदुजी और पूनम दोनों ही किसी फालतू पचडे में नही हैं !
और यही बात मुझे इस कहानी में इतना सोचने को विवश कर रही है !
अगर सभी लोग आपस में मिल बैठ कर सलाह करे ! और जो परेशानी है ! उसको दूर करे ! मुझे पता नही क्यों ? इस केस में लगता है की बात चीत के जरिये बात बन सकती है और एक गृहस्थी बचाई जा सकती है ! और समस्या की जड़ में चंदू या पूनम के पेरेंट्स ही निकलने चाहिए ! किसी भी रूप में !

अगर फ़िर भी नही बात बने तो भाई आज के जमाने में सबके अपने अपने राग है ! उनको जैसा दोनों को मंजूर हो , आपसी सहमति से
आगे बढे ! पर यहाँ चूंकी बच्चे भी हैं , तो उनके भविष्य को सर्वोपरि रख कर फैसला ले सकते हैं !

पर मेरे हिसाब से यहाँ अभी समझोते और बात-चीत की काफी गुन्जाईस मुझे तो दिखाई दे रही है ! मैं अपने आपको चंदू जी की जगह रख कर देखू तो सारा मामला निपटाया जा सकता है !

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ताऊ रामपुरिया said...
13 September 2008 at 5:39 AM  

भाटिया साहब, चंदुलाल जी ने कुछ गड़बड़ तो नही कर ली !
उनका कुछ समाचार नही आया ! क्या हुवा ?

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shama said...
24 January 2009 at 4:32 PM  

Raj ji,
Bohot kuchh padh khaamosh laut rahee hun...
aap samay nikaalke tippanee dete hain, is baatke liye hamesha shukrguzaar hun..
bade dinobaad kuchh likhaa aaj....ab phir kab likh paungee, pata nahee....ek vilakshan daurse guzar rahee hun....jab is "duvidhaka" ant hoga, tab, kya shuru hoga, nahee jantee....iswaqt duvidhame nahee, ek katghareme khadee hun....mere jeevan kee, pichhale 35 saalonkee, qeemat tay kee jaa rahee hai...mere vichaarse wo saal peshqeemtee hain....isliye khamosh hun....zindagee hisaab kitaab kya karegee....wo to uskee den jinhen miltee hai, wo log karte hain.....itne hisaabee, kitaabee bhee log ho jaate hain??
Vinay, gar naachnaa nahee chahtaa to nahee nachtaa....har wyakteekee ek pravruttee hotee hai...unkee maan ko guzre 15 saal ho gaye, gar uske baadbhee wo aise rahe to koyee kya kare ? Ye mere jeevankaa atal satya hai, ise sweekaar karnaa bhee mere liye aniwaary hai...mere halaatke liye koyee doshee nahee...mai kewal apne jeewankaa muaaynaa kar rahee hun...wobhee kisee ek maqsadke saath...jo maine aaj dobaaraa, jaate, jaate, zahir kar diya...
Mujhe aapki ye shrinkhala phirse, chainse padhnee hai....

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Madhur Chitlangia.... Helloraipur.com said...
31 March 2009 at 11:27 AM  

ye to sach baat hai ki akela beta hone ke karan mata pita ke sath rahna hi jaruri hai magar poonam ko samjhana bahut hi kadin hai pahle poonam ko samjhana chahiye ki agar budape me hamare beta ne esha kiya to kya hoga ..........Aapne bahut achha likha hai our bhi aap beeti hai madhur ki kalam me –www.helloraipur.com

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shri2256 said...
5 October 2013 at 8:19 AM  

इसी समस्या से मै भी झुझ राहा हू ..खाना काम हो गया है .सेम २ सेम यहि समस्या पढकर लागता है कहाणी मै हि हू ...

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 7:11 AM  


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