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एक काली काली कविता

.

एक था काला
हद से काला
कालो का राजा
नम्बर वन काला
स्याह काला
चार अफ़्रीकनो
से भी काला
कोआ भी
देख
शरमा जाये
कोयल
दीदी भी
नजरे
चुराये
बगाली काला
जादू भी
काम
ना आये
लुक(तार कोल)
कोयले
भी जिस के गुण गाण
करे
जो भी
इस काले महा राज
 के दर्शन
कर ले
उसे रात मै भी
दिखे
एक दिन
यह
कालो का

सरताज
गया एक
दुकान पर
बोला??
भाई मुझेदेदो
एक पकेट
पुरे का पुरा
फ़ेयर एण्ड लवली का
दुकान दार
इस काले
को देख
भुला सारे काम
ओर मना कर दिया
नही है जी
यार ऎसी ही कोई ओर
क्रीम दे दो
दुकान दार
ने मुडी
हिलाई
यार
 किसी
 भी कम्पनी
की चलेगी
लेकिन
दुकान दार ने साफ़
मना कर
दिया
फ़िर यह
कालू
 बोला
भाई
चैरी ब्ळोसम तो होगी??
तो वो ही देदो
कम से कम
चमक तो बनी
रहेगी

17 टिपण्णी:
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दिलीप said...
18 April 2010 at 5:04 PM  

achcha....
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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विनोद कुमार पांडेय said...
18 April 2010 at 5:05 PM  

दुकान दार ने सही चीज़ बताई कम से कम चमक तो बनी रहेगी...बढ़िया मजेदार काला कविता..धन्यवाद

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Tej Pratap Singh said...
18 April 2010 at 5:19 PM  

kala ka hasaya aacha hai..........

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राकेश जैन said...
18 April 2010 at 5:23 PM  

bahut hi kali hai kavita :)Good one

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डॉ. मनोज मिश्र said...
18 April 2010 at 5:25 PM  

मुझे तो यह सफेद लगी,आभार.

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Shekhar kumawat said...
18 April 2010 at 5:49 PM  

bahut khub


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

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पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
18 April 2010 at 5:50 PM  

हा हा हा...महाराज्! आप तो कविता में भी हाथ आजमाने लगे :-)
सचमुच बहुत बढिया लगी!

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M VERMA said...
18 April 2010 at 6:21 PM  

चमक बनी रहनी चाहिये
काला है तो क्या हुआ दिलवाला है

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परमजीत बाली said...
18 April 2010 at 6:54 PM  

bahut jordar !!!

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Suman said...
18 April 2010 at 7:05 PM  

nice

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संगीता पुरी said...
18 April 2010 at 7:10 PM  

मजेदार !!

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गिरीश बिल्लोरे said...
18 April 2010 at 7:22 PM  

गुरु
क्या बात है
गज़ब मज़ा आ गया

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Archana said...
18 April 2010 at 7:27 PM  

एक चमकीली... काली-काली कविता.........छोटी-छोटी बातें ...पर मैने पा ली कविता...

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दीपक 'मशाल' said...
19 April 2010 at 2:49 PM  

aapke prayog kiye gaye bimbon ki chamak niraali hai sir..

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दिगम्बर नासवा said...
20 April 2010 at 2:04 PM  

काले हैं तो क्या हुवा दिलवाले हैं ... च्माक बरकरार रहनी चाहिए ... अच्छी लगी आपकी ये अदा भी ...

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दिगम्बर नासवा said...
20 April 2010 at 2:07 PM  

काले हैं तो क्या हुवा दिलवाले हैं ... च्माक बरकरार रहनी चाहिए ... अच्छी लगी आपकी ये अदा भी ...

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:23 AM  



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