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पानी की टंकी यहां है जी....

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आज कल हमारे ब्लांग जगत मै कुछ देत्या समान लोग घुस आये है, ओर हमारे देवता समान ब्लांगर भाई ब्लांग जगत से प्रस्थान करने की सोच रहे है, हम ने भी कई बार सोचा... लेकिन जायेगे कहा बाबा इन रंगीन ओर प्यारी प्यारी गलियो को छोड कर, ओर जो हमे भगाने आयेगे हम उन्हे भगा देगे.

अब कई भाई बंधुओ ओर बंधनियो ने पूछा है जी वी टंकी कहां है, हम भी चढना चाहते है उस पर, तो सज्जन ओर सजन्नियो आप को आदर से सुचित किया जाता है कि पुराने वाली टंकी लोहे की थी, जो जंगाल खा कर चर मरा गई थी, ओर हमारे कई ब्लांगर  वहा से गिर कर जख्मी हो गये थे, ओर अब हमारी ब्लांगर कमेटी ने चंदा ईकट्ठा कर के यह नयी टंकी बनवानी शुरु की है, अभी काम चल रहा है.

आप सब को जान कर खुशी होगी की टंकी के ठीक नीचे हम ने ब्लांगर मीटिंग के लिये एक बडा हाल भी बनवाया है, ओर यह टंकी आधुनिक होगी यानी इस पर छत होगी ओर लिफ़्ट भी होगी, ओर सामाने ब्लांगर से बात करने के लिये मेदान मै भी एक वाताकुलिन खुली छत का कमरा होगा, ओर ऊपरे चढे ब्लांगर से बात करने के लिये वीरु ओर गांव वालो की तरह से चिल्लाना नही पडेगा, वल्कि माईक लगे होगे ओर हेड फ़ोन भी सभी को दिये जायेगे, ऊपर वाले ब्लागर को कोका कोला ओर पिज्जा भी दिया जायेगा, ओर जो उसे मनाने आयेगे उन्हे भी उन की पसंद का खाना दिया जायेगा, बिल वो देगा जो टंकी से उतरेगा.

बस टंकी का काम खत्म होने वाला है, जिन जिन ब्लांगरज  ने अपनी जगह बुक करनी हो, कृप्या वो समय रहते अभी बता दे, नोट यह सुबिधा सिर्फ़ हिन्दी वाले ब्लांगरो को दी जा रही है,टंकी पर आप किसी भी मोसम मै चढ सकते है, अगर आप अपनी जगह लेकिन अपने नाम से किसी ओर को  चढाना चाहे तो उस का इन्तजाम भी है, हम आप को दिहाडी पर आदमी देगे

तो ब्लांगर साथियो आप किसी गलत टंकी पर मत चढे, जहां कॊइ उतारने वाला ही ना हो, तो आईये आप हमारी इस टंकी पर ही चढे,डोनेशन देना चाहे तो हमारे से समपर्क करे, २६ जनवरी २०१० को सुबह ७ बजे हम इस टंकी का महुर्र्त कर रहे है, ओर आईये हम इस पर ब्लांगर झंडा लगा कर इस टंकी को महान बनाये

36 टिपण्णी:
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जी.के. अवधिया said...
12 January 2010 at 6:59 AM  

राज जी,

बुकिंग कराने के चार्जेस क्या हैं यह तो आपने बताया ही नहीं।

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पी.सी.गोदियाल said...
12 January 2010 at 7:00 AM  

अजी भाटिया साहब, मैं आ रहा हूँ , अभी पहुँच रहा हूँ जी :)

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पी.सी.गोदियाल said...
12 January 2010 at 7:02 AM  

BTW: बर्फ की वजह से टंकी में कोई फिसलन तो नहीं है ? :):)

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डॉ महेश सिन्हा said...
12 January 2010 at 7:26 AM  

बीमा वीमा करवा लिया है न आपने :)
कुछ दिस्क्लैमेर भी डाल दीजिये

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अन्तर सोहिल said...
12 January 2010 at 7:29 AM  

दूसरा आदमी चढाना हो तो कितनी दिहाडी देनी पडेगी जी
और हां ऊपर चढे आदमी के लिये मिलने वाली कोका कोला हम ही लेंगें

प्रणाम स्वीकार करें

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दिगम्बर नासवा said...
12 January 2010 at 7:29 AM  

एक कुर्सी हमारी भी बुक कर लें ..........

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ललित शर्मा said...
12 January 2010 at 8:52 AM  

हा हा हा भाटिया जी बहुत पुण्य का काम हैं टंकी बनवाना, कभी हमे भी चढना पड़ सकता हैं।उतारने लिए रम की बोतल लेकर:)

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पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
12 January 2010 at 9:23 AM  

अगर उतारने की गारंटी मिले तो एक बार हम भी ट्राई कर के देख सकते हैं :)

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Murari Pareek said...
12 January 2010 at 9:24 AM  

टंकी पर तो वीरू परा जी चढ़ने में उस्ताद हैं उनको कान्टेक्ट करता हूँ!!!

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अजय कुमार झा said...
12 January 2010 at 9:25 AM  

ये आपने बहुत ही अच्छा किया जो टंकी बनवा दी , हम तो जाने कित्ती बार चढे उतरे हैं , तब आपकी टंकी वाली फ़ैसिलिटी नहीं थी न , अब तो जब भी मन करेगा ......टैन टैनेन
अजय कुमार झा

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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
12 January 2010 at 1:31 PM  

नोट : टंकी के नीचे जाल की सुविधा है, यदि कोई गलती से फिसल पड़े तो जान जाने का कोई खतरा नहीं है।

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डॉ. मनोज मिश्र said...
12 January 2010 at 1:35 PM  

...जय हो.......हम अब जरा धर्मेन्द्र से टंकी पर उतरने और चढने वाला मन्त्र पूछ कर आते है.

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Udan Tashtari said...
12 January 2010 at 1:47 PM  

ठीक है, २६ तक पोस्टपोन .....उसके बाद चढ़ेंगे.

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बी एस पाबला said...
12 January 2010 at 2:07 PM  

टंकी का काम खतम हो जाए तो बताईएगा
दिहाड़ी वाला भी हिन्दी ब्लॉगर होगा क्या?

लेकिन यह बात बिल्कुल ठीक रखी आपने कि बिल वो देगा जो टंकी से उतरेगा :-)

बी एस पाबला

बी एस पाबला

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महेन्द्र मिश्र said...
12 January 2010 at 2:26 PM  

क्या बात है विशेष लोग ही टंकी पे उतरने चढ़ने में माहिर होते है ...उनके काम की चीज है ... कल मुझेसे से भी एक भाई ने टंकी का पता पूछा था .. आपने अच्छा बता दिया ..आभार.

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बवाल said...
12 January 2010 at 3:26 PM  

आदरणीय राज जी,
इस टंकी पर चढ़ने का तो अब हमको भी मन करने लगा है। क्या बतलाएँ जी ?
बहुत संजीदा बात कही है आपने इस पोस्ट में।
काश इसका मर्म समझा जाए।

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गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...
12 January 2010 at 3:46 PM  

दादाजी जे क्या
आपने पूरी टंकी मेरे नाम से बुक कर दी थी
और अब बस इश्तहार दे दिए
हम कुट्टी हो गए इस बार न चढ़ेंगे
हमने मुंसीपाल्टी की लोकल टंकी
जुगाड़ ली आप इस बार किसी बाबा को बुलावा लीजिये देर बाबा साथ में
हीरोइनें लिए घूम रहे हैं ब्लॉग बाड़े में

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अनूप शुक्ल said...
12 January 2010 at 5:20 PM  

जब भी कोई ब्लॉगर टंकी पर चढ़ने की घोषणा करता है तो मुझे ब्लॉगिंग का यह सूत्र याद आ जाता है:
जब कोई ब्लागर अपना ब्लाग बन्द करने की धमकी देता है तब यह समझ लेना चाहिये कि वह नियमित लेखन के लिये कमर कर चुका है।

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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...
12 January 2010 at 6:44 PM  

हम तो भाई केवल तमाशा देखने आएंगे।

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राज भाटिय़ा said...
12 January 2010 at 8:02 PM  

अब तो भीड बढती जा रही है , लेकिन डरे नही ऊपर जाने के लिये लिफ़्ट है, ओर टंकी के चारो तरफ़ जाली लगी है, अगर कोई पी कर चढ जाये या फ़िसल जाये, गिर जाये तो उसे चॊट ना आये, मनाने वाले जो आये गे वो फ़्रि मै है ओर उन्हे खाना पीना मिलेगा, जो तमाशा देखने आयेगे उन से फ़ीस ली जायेगी

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मनोज कुमार said...
13 January 2010 at 2:25 AM  

बढ़िया है। हम भी हैं।

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गिरिजेश राव said...
13 January 2010 at 4:00 AM  

इस पर चढ़ने के लिए सीढ़ी तो दिख ही नहीं रही। बनवा दीजिए। 26 जनवरी को मैं भी प्रयत्न करना चाहता हूँ। शुभ मुहुर्त को व्यर्थ क्यों जाने दिया जाय ?

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खुशदीप सहगल said...
13 January 2010 at 5:19 AM  

टंकी पर चढ़ कर कौन-कौन कहता है...

कूद जाऊंगा, फांद जाऊंगा...

गब्बर की सब पर नज़र है... जो टंकी पर सबसे ज़्यादा टुन्न होगा...उसी को गब्बर ठहराएगा ब्लॉगर टंकीबाज़ शिरोमणि...

जय हिंद...

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Anil Pusadkar said...
13 January 2010 at 6:30 AM  

जो चढेगा उसे उतरना तो पड़ेगा ही भाटिया जी,नही तो जायेगा कंहा?हा हा हा।इसलिये अपुन तो कभी चढते ही नही,वरना वो नये टाईप का शेर,चीता जो भी समझो है ना,

खुदी को बुलंद करके वो चढा ऊपर जैसे-तैसे,
तो खुदा ने पूछा कि बेटा अब नीचे उतरेगा कैसे?

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निर्मला कपिला said...
13 January 2010 at 12:18 PM  

भाटिया जी अभी भाभी जी को बुला कर लाती हूँ वहीं रहिये। लोहडी की पूरे परिवार को शुभकामनायें

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dhiru singh {धीरू सिंह} said...
13 January 2010 at 5:18 PM  

tanki ke liye passport ki to jarurt nahi hai?

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सर्वत एम० said...
14 January 2010 at 5:42 AM  

भाई साहब, आपका कोटि-कोटि धन्यवाद, आपने आम आदमी, ब्लोगर्स के लिए टंकी की व्यवस्था कर दी. अब तक टंकियों पर या तो मंत्री-संतरी चढ़ते थे या इंजिनियर. छोटा-मोटा इंसान चढ़ता था तो सफाई मात्र के लिए. हाँ, खुदकुशी के इरादे से कुछ आम जन जरूर इस सुविधा का लाभ उठा लेते थे. अब पब्लिक एड्रेस के लिए आपने यह एयर कंडीशंड व्यवस्था दे कर हम ब्लोगर्स पर एहसान किया है.
दो एक सवाल मन में आए हैं, पूछना चाहता हूँ क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती एवं आम जन की सुरक्षा हेतु ये महत्वपूर्ण हैं.
१. यह टंकी आपने ठेके पर बनवाई या स्वयं मजदूरों की व्यवस्था की?
२. इसकी लागत आपने अपनी जेब से दी या चंदा एकत्र किया?
३. क्या इसके लिए आपकी कहीं से अनुदान मिला?
४. यह टंकी आई.एस. ओ. प्रमाणित है?
५. इस से पहले टंकी कब बनवाई थी और कहाँ?
और अंत में ........... क्या आपके पास कोई हालिया चरित्र प्रमाण पत्र मौजूद है?
यदि मेरे इन प्रश्नों का समुचित समाधान आपके पास है तो मैं इस सुविधा का लाभ लेने हेतु पंजीयन कराना चाहता हूँ, नियम एवं शर्ते शीघ्र भेजें.

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श्याम कोरी 'उदय' said...
17 January 2010 at 3:58 AM  

... bahut khoob, ... binaa basanti ke tanki par romaans kam rahegaa .... 26 jan. ko bhee taajaa haal prasaaran ka intajaar rahegaa !!!!!

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alka sarwat said...
17 January 2010 at 8:52 AM  

मैंने आपके इस नव निर्माण की बहुत चर्चा सुनी थी इसलिए पढने सोरी देखने आ गयी ,मैं तलाश रही थी की इस पे कहीं जड़ी-बूटी उगाने की जगह है कि नहीं ,ताकि पर्यावरण सुधार समितियों को आपके खिलाफ भड़का सकूँ

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Devendra said...
17 January 2010 at 12:44 PM  

हमको अपनी जगहं पता है हम नहीं चढ़ने वाले किसी पानी टंकी पर.

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विनोद कुमार पांडेय said...
17 January 2010 at 7:10 PM  

राज जी टंकी के उद्‍घाटन समारोह में उपस्थित होना भी बहुत बड़े सौभाग्य की बात है ब्लॉग जगत के लिए यह एक गौरव की बात है आसमान को छूता एक जगह मिला..बढ़िया एवं मजेदार प्रसंग...बहुत बहुत धन्यवाद राज जी!!

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ज्योति सिंह said...
18 January 2010 at 5:39 PM  

anup ji ne bahut khoob kahi ,ye lekh kafi mazedar raha ,tanki ki dhamki , sujhav aur saath hi aamatran sab hi shaandaar hai .

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'अदा' said...
21 January 2010 at 6:45 PM  

राज जी,
ये अच्छा किया परमानेंट टंकी बनवा लिए...
भाभी की को बुला लीजियेगा....बसंती की ज़रुरत होगी न....:):)

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Kulwant Happy said...
23 January 2010 at 1:54 PM  

जोधा कभी मैदान नहीं छोड़ता राज भाटिया जी।

फेसबुक एवं ऑर्कुट के शेयर बटन

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kshama said...
30 January 2010 at 3:57 PM  

Ha,ha,ha...maza aa gaya!

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:27 AM  



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