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माधुर्य का रस

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आज का विचार.....
जीवन के माधुर्य का रस लेने के लिये हमें बीती बातो को भुला देने की शक्ति अवश्य धारण करनी चाहिये

24 टिपण्णी:
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Nirmla Kapila said...
20 November 2009 at 1:42 PM  

भाटिया जी बहुत सुन्दर संदेश है धन्यवाद और शुभकामनायें

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Udan Tashtari said...
20 November 2009 at 2:05 PM  

सत्य वचन!!

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Dr. Mahesh Sinha said...
20 November 2009 at 2:07 PM  

सच्ची बात

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जी.के. अवधिया said...
20 November 2009 at 2:25 PM  

सही है जी!

बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेय!

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पी.सी.गोदियाल said...
20 November 2009 at 2:40 PM  

मगर भाटिया साहब क्या यह प्रैक्टिकली संभव हो पाता है ?

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दिगम्बर नासवा said...
20 November 2009 at 2:57 PM  

BAHYT ACHHA SANDESH HAI ......

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राज भाटिय़ा said...
20 November 2009 at 3:29 PM  

@पी.सी.गोदियाल जनाब नही, मै कई ममलो मै ऎसा नही कर पाया,

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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...
20 November 2009 at 3:29 PM  

सही बात।
बीती ताही बिसार दे, आगे की सुध ले।

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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...
20 November 2009 at 4:08 PM  

very true

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महफूज़ अली said...
20 November 2009 at 4:11 PM  

bahut sunder sandesh....

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aarya said...
20 November 2009 at 4:53 PM  

भाटिया जी
सादर वन्दे!
कुछ घाव भरते नहीं इसीलिए भूलते नहीं!
लेकिन अंत में बात आप की ही सही है !
विचार अच्छा है!
रत्नेश त्रिपाठी

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विनोद कुमार पांडेय said...
20 November 2009 at 5:22 PM  

सत्य वचन..अनुकरणीय..धन्यवाद भाटिया जी

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पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
20 November 2009 at 8:09 PM  

बहुत ही सुन्दर सन्देश्!!!!!

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मनोज कुमार said...
21 November 2009 at 2:38 AM  

जो बीत गई सो बात गई। अच्छा सोदेश।

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ताऊ रामपुरिया said...
21 November 2009 at 11:01 AM  

बात तो आपकी सही है पर लोगों की गालियां कानों मे सपने मे भी गुंजती हैं उसका क्या करे?:)

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अल्पना वर्मा said...
22 November 2009 at 9:27 AM  

waah!kya baat kahi hai!jo beet gayi so beet gayi...

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BrijmohanShrivastava said...
22 November 2009 at 2:55 PM  

जो बीती यादों के सहारे ही जी रहे हैं उनका क्या होगा
और वैसे भी बहुत कठिन है बीती बातों को भुला देना
और यह भी सही है कि भुला देने पर ही व्यक्ति आनंदित रह सकता है

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JHAROKHA said...
22 November 2009 at 3:38 PM  

Sach kaha hai apane---

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आशुतोष दुबे 'सादिक' said...
23 November 2009 at 11:32 AM  

बहुत ही सुन्दर सन्देश्!
हिन्दीकुंज

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लोकेन्द्र said...
23 November 2009 at 3:40 PM  

तभी जीवन का मजा है.......
सत्य कहा आपने.....

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Murari Pareek said...
24 November 2009 at 7:08 AM  

सही है बीती को बिसारिये!!!

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श्याम कोरी 'उदय' said...
26 November 2009 at 2:46 PM  

... अनुशरण प्रारम्भ !!!!!

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mark rai said...
28 November 2009 at 2:32 PM  

अगर तूफ़ान में जिद है ... वह रुकेगा नही तो मुझे भी रोकने का नशा चढा है ।

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 4:31 AM  


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