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किने किने जाना बिल्लो दे घर

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किस किस ने बिल्लो के घर जाना है, वो पहले लाईन मै आये, फ़िर टिकट कटाये... ओर इस गाडी मे सवार हो जाये......

9 टिपण्णी:
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Ratan Singh Shekhawat said...
26 December 2008 at 3:59 AM  

शायद यही राज है भारतीय रेल के लाभ में चलने का ?

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रंजन said...
26 December 2008 at 6:20 AM  

सब बाहर फोकट में लटके है, अन्दर तो गाड़ी खाली पड़ी है..:)

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Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
26 December 2008 at 7:59 AM  

ये तस्वीर जरूर पाकिस्तान की होगी.

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संगीता पुरी said...
26 December 2008 at 8:29 AM  

लोग किसी रैली में जा रह हैं क्‍या ?

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hempandey said...
26 December 2008 at 11:30 AM  

ये लोग मौत के मुंह में जाना चाह रहे हैं. ये बात अलग है की मौत इन्हें पसंद करती है कि नहीं.

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समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...
26 December 2008 at 2:40 PM  

पाकिस्तानी ट्रेन है .फेविकोल का मजबूत जोड़ लगाकर ट्रेन में चिपके है . फिदादीन बनने जा रहे है लटक लटक कर .

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नीरज गोस्वामी said...
26 December 2008 at 4:09 PM  

राज साहेब किथ्थों ले के आए हो तुसी ऐ कमाल दी फोटो.....कमाल कर दित्ता जे...वा जी वा...लाजवाब.
नीरज

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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...
26 December 2008 at 6:08 PM  

ऐसा नजारा तो रेलमन्त्री लालूजी के गृहराज्य में देखने को मिलता है। ...एक अन्तर जरूर है कि वहाँ टिकट नहीं कटाना पड़ता। :)

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 6:22 AM  


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