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आप सब को नमस्कार

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यह इस ब्लॉग की पहली पोस्ट हे, और आप सब का सहजोग भी चाहिये ,
नमस्कार,मॆ काफ़ी समय से सोच रहा था,कि कुछ नया करु,लेकिन क्या ? बहुत सोचा लेकिन दिमाग मे कुछ भी नया नही आया, लोग पहले से ही हर आईडिया ले कर बेठे हे,लेकिन करना तो हे कुछ,जिस से मे लोगो को कुछ दे सकू,उन के दुख ओर सुख मे हाथ बटां सकु,लेकिन केसे ?फ़िर मेने सभी तो नही बहुत से ब्लॉग पढे, कविताये पढी, ओर बहुत कुछ पढा, फ़िर मेरे पास हिन्दी की कई पत्रिकाये आती हे, कभी कभी उन्हे पढा, तो एक बात समझ मे आई कि लोगो के दिल मे बहुत सी ऎसी बाते हे, जो वो किसी से कहना चाहते हे, लेकिन किस से कहे, आज किसी को अपना समझ कर आप ने दिल की बात कह दी, कल किसी बात पर मनमुटाव हो गया तो वो कही बात जग हसांई बन जाती हे,

तो बात किस से कहे, कई बार बहुत खुशी की बात होती हे, लेकिन हमे कोई मिलता नही जिस से बात कर सके, कभी दिल मे बहुत दुख होता हे,कई बार ऎसी बात होती हे जो कहना चाहते हे लेकिन शर्म से या फ़िर लज्जा से,हम अपने दिल की बात कह नही पाते, फ़िर वही बात हम अपने दिल मे सोच कर कुडते रहते हे, जो बाद मे कई बार बडी बीमारी का सबाब बन जाती हे,कई बार हमे आत्महत्या जेसे काम करने पर मजबुर कर देती हे.

बात करे तो किस से,किस पर भरोसा करे,कई लोग ऎसा सोचते हे,ओर वो सही सोचते हे,लेकिन मेने देखा हे कि अगर कोई भी बात हम किसी भी भरोसे वाले व्यक्ति से करे तो कई बार सही सलाह भी मिल जाती हे,यह मंच मेने यही सोच कर बनाया हे कि आप अपने दिल की कोई भी बात हमारे साथ बाटं सकते हे, हमे बता सकते हे, आप की पुरी गोपनियता रहे गी, अगर आप अपना नाम नही बताना चाहते तो किसी भी अन्य नाम से, बेनाम से टिपण्णी के रुप मे,email, के रुप मे हमे बताये, ओर अगर आप चाहते हे तो हम उस बात को प्रकाशित भी कर सकते हे, ताकि अधिक से अधिक लोगो की सलाह मिल सके,आप की कहानी आप के नाम के साथ, आप के नाम के बिना, जेसा आप चाहेगे, वेसे ही हम उसे प्रकाशित करेगे,

दिल की बात हम से बाटें, हमे आप का नाम ,पता, फ़ोन ना०, e mail, या अन्य जानकारी कुछ नही चाहिये, बस आप का सुख, दुख, आप जो किसी को कहना चाहते हे, ओर कोई मिलता नही तो हमे कहिये,अगर आप को सलाह चाहिये तो जितना हो सका हम सलाह जरुर देगे, अगर मे कुछ लोगो के होंठो पर एक मुस्कूराहठ ले आऊ तो मुझे खुशी होगी,

जब आप चाहे गे तभी आप की कहानी, आप की परेशानी, आप का सवाल, आप की खुशी प्राकशित होगी, आप चाहे गे तो आप के नाम के साथ आप चाहे गे तो आप का नाम बदल कर ओर जगहो के नाम, ओर पात्र बदल कर .

बहुत सी बाते हे, जो कुलबुलाती हे जिस से हमारा ब्ल्ड प्रेशर बढ जाता हे,अच्छी बुरी, कोई काम कर के हमे पछतावा होता हे,ओर किसी को बताना चाहते हे,पति से, पत्नि से कोई गलती हो गई सलाह चाहिये, क्यो कि आप ने जान बुझ कर गलती नही की, ओर अपने परिवार को भी नही खोना चाहते, बाप बेटे मे किसी बात को लेकर अनबन हे, भाई भाई , बहुत सी बाते हे,जब चाहो (अपना परिचय छुपा कर भी) मुझे लिखो, अपनी दिल की बात जो किसी से नही कह पाये ओर कहना चाहते हो तो उडेल दो.
लेकिन किसी के बारे मे मे यहां कोई अपशव्द नही लिखुगा, यह ब्लॉग आप सब का हे आप मुझे नये आडिया भी दे सकते हे,
धन्यवाद
राज भाटिया

13 टिपण्णी:
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G M Rajesh said...
22 August 2008 at 8:09 AM  

apne man ki likhne ko hi to blog bana hai aap apni kahen chahen auron ke good thoughts

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मीत said...
22 August 2008 at 8:13 AM  

bahut acha kadam uthaya hai apne....
iske liye apko dher sa dhnyawad...

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sumati said...
22 August 2008 at 7:20 PM  

raj sahab ,
main apne blog ,shayad aap gaye bhi hain vahantak,incomplet-sumati.blogspot" main shuru se apne se baten karta raha hun mere ander ki tamam uljhane ,chhatpatahat unmen dikhai deti hai shuruati posts main se mujhe ek theek theek yad hai,ice-cream vs mango ,jismai main icecream lene ghar se nikalta hun kailash ker ka gana sunta hun nai car ki drive enjoy karta hun aur der se khali hanth lautne ke jhagde se bachne ke liye aam kharidleta hun aur parivar k sath baith kar aam khata hun..kehne ka etna sa matkab hai hum lene kuchh nikalte hain ,milta kuchh hai aur dikhate kuchh aur hai aise zindgi ke dam ghautu pattern per hum sabhi hai . lekin apne dard dhanpe(cover)hue hai ..blog per bhi gup chup koi koi log ughad lete hain lekin aap ne jis saafgoi se humari dikkaten hum se mangi hain vo aap ka kaayal banati hai ....abhi bahut dikkaten hain ....kuchh sochlun tab prathmikta ke aadhar per bata chalunga...thank u sir

sumati

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P. C. Rampuria said...
23 August 2008 at 2:27 PM  

नए ब्लॉग की बहुत शुभकामनाएं ! ईश्वर आपको
अपने उद्देश्य में सफलता प्रदान करे यही प्रार्थना
करता हूँ ! और नेक कामों में ईश्वर का आशीर्वाद
मिलता ही है !

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सतीश सक्सेना said...
24 August 2008 at 11:10 AM  

राज साहेब !
नए विषय पर ब्लॉग बनाने के लिए मेरी शुभकामनाएं ! विषय नया है, प्रयोग भी नया ही होगा! यहाँ हिन्दी ब्लाग जगत के लोग कम रिएक्टिव नहीं है ?? सावधान रहिएगा !
सादर

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अभिषेक ओझा said...
24 August 2008 at 10:19 PM  

Swagat hai naye blog ka ! aur shubhkaamnaayein bhi !

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Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...
24 August 2008 at 10:44 PM  

अच्छा प्रयोग है. शुभकामनाएं!

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राज भाटिय़ा said...
25 August 2008 at 5:58 PM  

आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद

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kmuskan said...
26 August 2008 at 12:53 PM  

raj ji
naye blog ke liye aapko bahut bahut shubkamnaye.life ki choti choti batain jinke karan hum man hi man me ghutte rahte hai ,uske liye aapne ye blog banaya,aapko bahut si badhai or shubkamnaye

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makrand said...
28 August 2008 at 9:15 AM  

बहुत सुंदर कहानी है !
बचपन याद आगया !
धन्यवाद !

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tarun said...
29 August 2008 at 9:28 AM  

राजीव जी आपकी बात भा गयी , मेरे दिमाग में कई बार ये ख्याल आ चुका है लेकिन मैं अधिकतर लोगो की तरह उसे परिणत नही कर सका हूँ । आपने छोटी-छोटी बातों का बड़ापन पहचाना उसके लिए आपका धन्यवाद कहना चाहूँगा यदि वो शिष्टाचार के विरूध्द न समझा जाए तो । मेरे पास कई ऐसी बातें हैँ जो मैंने अब अपनी डायरी के अलावा किसी से नही कही है लेकिन अंदर दिल चाहता है कि ये बात मैं सब को बता दूँ ।

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राज भाटिय़ा said...
29 August 2008 at 4:56 PM  

आप सभी का धन्यवाद, ओर आप सभी की शुभकामयो से अज मेरी पहली पोस्ट आप सब के नाम.
फ़िर से धन्यवाद

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P Chatterjee said...
3 November 2016 at 7:16 AM  


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नमस्कार,आप सब का स्वागत हे, एक सुचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हे, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी हे तो माडरेशन चालू हे, ओर इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा,नयी पोस्ट पर कोई माडरेशन नही हे, आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये

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