Oct
04
आज का विचार
.
राज भाटिय़ा
.
विचार
आज का विचार...
समस्यां चाहे कैसी भी हों, परन्तु इन से घबराइये नही, बल्कि इन्हें परीक्षा समझ कर पास कीजिये.
Post a Comment
नमस्कार,आप सब का स्वागत हे, एक सुचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हे, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी हे तो माडरेशन चालू हे, ओर इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा,नयी पोस्ट पर कोई माडरेशन नही हे, आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये
टिप्पणी में परेशानी है तो यहां क्लिक करें..
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।*जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा। महात्मा गांधी
अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की
शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"महामना मदनमोहन मालवीय
4 October 2009 at 9:17 am
बिल्कुल सही बात!!
जिस प्रकार से बिना चाबी के कोई ताला नहीं होत उसी प्रकार बिना हल के कोई समस्या नहीं होती।
4 October 2009 at 9:26 am
अनमोल बातें होती हैं आपके विचारों में .. आभार
अर्श
4 October 2009 at 9:27 am
आत्मविश्वास बढ़ाता सुंदर विचार...धन्यवाद
4 October 2009 at 10:06 am
उत्तम विचार्!
ऎसी कोई समस्या नहीं है,जिसका कि हल न हो......जरूरत है तो बस हौंसले और सही प्रयास की ।
4 October 2009 at 10:07 am
राज जी, लोहा आग में तप-तप कर ही कुंदन बनता है...
एक बात और मैं महसूस कर रहा हूं आप भारत से बाहर रहते हुए भी भारतीयता से ज़्यादा जुड़े हुए हैं...हम भारत में रहने वालों से कहीं ज़्यादा यहां की मिट्टी की सोंधी खुशबू आपकी बातों-सासों में रची-बसी है
...आपने गगन जी से पूछा था कि क्या अब भी देश में भाजी में मठ्ठियां, शकर पारे, बालू शाही, गुड़ की मिठाई भेजने का रिवाज बचा है...बड़े शहरों की तो कह नहीं सकता लेकिन छोटे शहरों में आज भी इस परंपरा को बड़े मान के साथ निभाया जाता है...कभी भारत आएं तो खिदमत का मौका दीजिए...सारे रस्मों-रिवाज से आपको रू-ब-रू करा देंगे...
जय हिंद...
4 October 2009 at 10:14 am
प्रेरक अनमोल विचार राज जी . आभार
4 October 2009 at 10:24 am
हमारी कमेन्ट गुम हो गयी. आपने सही कहा है. लेकिन एक बात याद रखने की है की परीक्षा में हमेशा पास हो जाएँ यह जरूरी नहीं है. फेल होने पर निराश हुए बगैर दुबारा परिश्रम कर इम्तहान दिया जाता है.
4 October 2009 at 10:34 am
एक पंक्ति में जीवन का सारा सार कह डाला आपने..जो ये समझ पाते हैं...जीवन वही जीते हैं..अन्य लोगों की तो जिंदगी होती है....जो बीत ही जाती है..
4 October 2009 at 10:59 am
आपने तो सफल जीवन का फंडा ही क्लीयर कर दिया !
4 October 2009 at 12:44 pm
डरने वाले कब जीतते है भला.
सुन्दर विचार
4 October 2009 at 2:56 pm
sunder vichar,sahi hame samasya se ghabarana nahi chahiye.
4 October 2009 at 6:48 pm
ट्राई करेंगे भाटिया जी।
4 October 2009 at 6:51 pm
SATY VACHASN BHAATIYA JI .....SAMASYA SE GHABRAAYE BINA USKA SAAMNA KARNA HI PURUSHAARTH HAI ...
4 October 2009 at 7:06 pm
विचार अच्छा है पर राह कठिन:)
4 October 2009 at 7:18 pm
100 फ़ीसदी सच।
5 October 2009 at 6:50 am
बिलकुल भाटिया साहब, इंसान वही है जो परिस्थितियों से डट कर मुकाबला करे ! एक सद विचार
5 October 2009 at 12:44 pm
raaj ji ,
namaskar
aapke aaj ke is vichar ne man prafullit kar diya
main zindagi ki kuch samasyaao se guajar raha hoon ,aur aaj aapke vichar ko padhkar bahut accha laga
aapko pranaam..
regards,
vijay
pls read my 100th post .
www.poemsofvijay.blogspot.com
5 October 2009 at 8:30 pm
shat prtishat satya hai bhatiya ji .niti vachan jeene ki umeed jagate hai ,hausala badhate hai .
apni aur se bhet swaroop ek amrit vachan main bhi ....
doosaron ki fuhrta pe hasna ,apni fuhrata pragat karana hai .
6 October 2009 at 10:35 am
सच्ची और अच्छी बात..
6 October 2009 at 7:11 pm
फेल भी हो जाये तो फिर परीक्षा मे बैठे और पास करे
5 August 2010 at 3:22 pm
hameha kush raho.
13 June 2011 at 8:24 pm
जिन्दगी इम्तहान लेती है .
22 November 2012 at 8:01 am
Student Period is golden period of all life period.....
Post a Comment