Oct
02
विचार
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राज भाटिय़ा
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विचार
नमस्ते.
अगर आप सदा स्वयं की दूसरो के साथ तुलना करते रहते है, तो आप अवश्य ही अहंकार अथवा ईषर्य़ा के शिकार हो जायेंगें
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मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।*जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा। महात्मा गांधी
अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की
शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"महामना मदनमोहन मालवीय
2 October 2009 at 4:48 am
उत्तम विचार। धन्यवाद।
2 October 2009 at 5:36 am
बहुत सुन्दर विचार है भाटिया जी!
एक विचार मेरी और से भीः
"स्वयं की तुलना कभी भी किसी अन्य से न करें, यदि आप करते हैं तो स्वयं का ही अपमान करते हैं।"
2 October 2009 at 7:01 am
सुन्दर विचार।
2 October 2009 at 7:10 am
chhoti nahi bahut badi baat kahi hai aapne bhatiya ji namaskaar..sahib
arsh
2 October 2009 at 7:29 am
खबर्दारिया विचार !
2 October 2009 at 1:24 pm
बहुत नायाब विचार.
रामराम.
2 October 2009 at 5:49 pm
सुन्दर विचार
3 October 2009 at 9:50 am
saty vachan!
3 October 2009 at 12:23 pm
अच्छा है।
Think Scientific Act Scientific
3 October 2009 at 3:44 pm
मैं अपनी तुलना किसी से नहीं कर रहा, यह भी अहंकार का कारण हो सकता है।
3 October 2009 at 4:06 pm
बहुत सुन्दर और सत्य वचन हैं धन्यवाद
5 October 2009 at 12:28 pm
Is vichaar ka to pata nahi..bahut gehra h shayad... lkn aapka vichaar muje bahut achha laga... ye sundar vichaar hamare sath baantne k liye shukriya...
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