बेचारा गरीब मजदुर????
हमारे भारत देश मै तो सच मै एक मजदुर बेचारा ओर गरीब ही है, जो सारा दिन कडक्ती धुप मैकाम करता है, लेकिन उसे शाम को भर पेट रोटी भी नसीब नही होती, सारा दिन काम करने के बाद उसे ८०,९० रुपये मिलते होंगे,अगर वो बीमार हो जाये ,या उस का बच्चा, बीबी, मां बाप कोई भी बीमार हो जाये तो उस बेचारे का क्या होगा? भगवान जाने? ओर हमारे मजदुर के पास कपडे भी कहा ठंग के होते है....... जो दुसरो को छत बना कर देत है वो खुद बिना छत के सोता है,
मेरे पडोसी के घर मै गेराज बन रहा है, वो खुद भी एक मजदुर ही है, आज सुबह से ही बहुत आवाजे आ रही थी, मेने देखा तो दो तीन लोग काम कर रहे थे, तो मेरे ब्लागिंग वाले दिमाग मै झट से एक पोस्ट की रुप रेखा तेयार हो गई....
यह ऊपर वाले चित्र मै भी ध्यान से देखे तीन मजदुर दीवार बना रहे है, ओर यह चोथा आदमी जो बुल्डोजर पर चढ रहा है यह ओर इस का पिता भी एक मजदुर है, ओर यह बडा सा घर भी इन का ही है, यानि यहां के मजदुर को पीसा नही जाता, यहां यह मजदुर घंटो के हिसाब से काम करते है, ओर एक घंटे के यह १८ € से २५ € के बीच लेते है, फ़िर इन्का मेडिकल कलेम, टेक्स,बेरोजगारी भत्ता, ओर पेंशन के पेसे कट कर बाकी तन्खा इन्हे हर महीने बेंक मै मिल जाती है, सभी मजदुर अपनी अपनी कारो मै आते है, ओर काम के बाद यह भी हम आप जेसे आम कपडे पहनते है, इन्हे कोई गरीब या बेचारा कह कर तो देखे, इन की आमदनी भी एक ओफ़िसर जितनी ही होती है.
यह सब भारत मै भी हो सकता है, ओर जिस दिन यह सब भारत मै होगा उस दिन हम अपने आप को विकास शील कह सकते है,आओ हम इन बातो मै इन युरोपियन की नकल करे, हर हाथ को काम तो हो लेकिन उसे दाम भी सही मिले, सिर्फ़ काम हो ओर मिल मालिक, या कम्पनी का मालिक अमीर ओर अमीर होता जाये ओर मजदुर रोटी के ही चक्कर लगाते रहे... क्या यह उचित है, मेहनत कोई करे, फ़ल कोई ओर ले??
Tuesday, June 29, 2010 | 9 Comments
आईये हम अपने ब्लाग मित्र के बारे कुछ सुध ले...
भगवान से यही प्राथना करता हुं वो जल्द ठीक हो कर फ़िर से हमारे बीच आये, अगर किसी के पास उन का मोबाईल ना०, फ़ोन ना० हो या ई मेल तो मुझे ई मेल से जरुर डाले.
अन्त मे मै उन की सेहत के बारे भगवान से यही प्राथना करता हु जल्द से जल्द स्वस्थ्य हो ओर फ़िर से वापिस आ कर हमे राम राम करे, नमस्ते कहे, आप इस समय जहां भी है मेरी ओर पुरे ब्लांग जगत की नमस्ते स्वीकार करे.
Saturday, June 05, 2010 | 35 Comments
गाऊ माता????
अब बात करते है इस चित्र की, बचपन मै हम देखते थे कि गर्मियो मै जगह जगह प्याऊ होते थे, ओर उस के साथ ही जानवरो के पीने के लिये पानी की व्यवस्था होती थी, यानि जो पानी नीचे गिरता था वो सीधा टब मे जाता ओर वहां प्यासे जानवर भी आ कर पानी पी लेते थे, लेकिन जेसे जेसे हम आधुनिकता की ओर बढते गये, हम मै इंसानियत मरती गई, अब हम अपनी पानी की बोतल तो साथ रखते है, लेकिन इन मासूम ओर निर्दोष जानवरो का ख्याल बिलकुल नही करते, मुझे आज भी याद है कि कई बार भरी दोपहरी मै हमारे गेट पर गाय या कोई अन्य जानबर आ कर सींग मार कर बुलाते थे, ओर मै मां के कहने पर उन्हे बाल्टी भर कर पानी पिलाता था, ओर मां कहती थी बेटा यह पुन्य का काम है.... तो अब गर्मियां शुरु हो गई है अगर आप भी रोजाना एक जानवर को भर पेट पानी पिला दे तो आप को भी पुन्य जरुर मिलेगा, जरुरी नही वो गाय ही हो बंदर कुता, गधा, भेंस या कोई भी जानवर देखे जो प्यासा हो उसे एक बार पानी पिला कर देखे आप को कितनी शांति मिलती है, इन जानवरो को भी तो हमारी तरह से ही प्यास लगती है ना..... बस यह बोल नही सकते.
Saturday, May 08, 2010 | 27 Comments
हुक्का
नमस्कार, आप सभी को,हुक्का बिलकुल आम है, शहरो मै तो यह बहुत कम दिखता होगा, शायद उन्ही जगह पर जहां लोग गांव से आये हो ओर साथ मै कुछ यादे ले आये,हुक्का कहने मात्र को ही एक हुक्का है लेकिन इस के साथ एक बहुत बडी समाज कि वय्वस्था जुडी है.
यहां जर्मनी मै , मेरे कई जान पहचान के जर्मन लोग भारत के बारे बहुत सी बाते जानना चाहते है, ओर जिन्हे सही लेकिन सच ओर साफ़ शव्दो मै बताना कई बार कठिन होता है, ओर कई बातो को समझाना बहुत मुश्किल होता है, एक तरफ़ हमारा देश जिस की बुराई हम से बर्दास्त नही होती, हम भारत वासी आपस मै लाख बात करे बुरा नही लगता, लेकिन जब कोई विदेशी भारत के बारे गलत बोलता है तो हम तिलमिला जाते है, हम क्या हमारे बच्चे भी भारत के बारे गलत नही सुन पाते, ओर हम अपनी बुराई को भी अच्छाई का जामा पहना कर इस तरह बताते है कि सामने वाला चुप हो जाता है.
कुछ समय पहले दोस्तो ने पुछा कि आप के यहां सिगरेट पीते है? शराब पीते है? वगेरा वगेरा....तो मेने कहा जो बुराईया इस समाज मै है वो बुराईया हर समाज मै होती है, ना आप दुध के धुले है ओर ना हम ही, अच्छे बुरे लोग हर समाज मै होते है... तो बातो के बीच मुझे हुक्का याद आ गया, वेसे तो मेरे घर मै आप को हाथ से हवा करने वाला पंखे (पखीं) से लेकर कुंडी सोटा( चटनी ओर मसाले पीसने वाला ) मिलेगा, ओर बहुत सी चीजे जो आज भारत से गायब होचुकी है एक ढोलक, मंजिरे, यानि आधा घर भारत से ही भरा है एक भारत का झंडा जिसे बच्चो ने अपने कमरे मै लगा रखा है.
तो बात चली हुक्के से, मेने इन लोगो को बताया कि हमारे यहां तम्बाखू को पीने के लिये यह सिगरेट तो बहुत बाद मै आई, ओर यह सिगरेट बहुत सी बिमारियो का घर भी है, हमारे देश मै पहले पतो से बनी बिडी आई, ओर उस से पहले हुक्का, जिस का कोई इतिहास नही, लेकिन यह हुक्का सिर्फ़ तम्बाखु पीने के काम ही नही आता, वल्कि समाज को एक कानुन मै बांधने के काम भी आता है? अब इन जर्मनो को यह बात बहुत अलग सी लगी कि एक चीज जो नशे के रुप मै है वो समाज को केसे सुरक्षा दिला देगी.
तो मेने इन्हे बताया कि हुक्का अकसर गांव मै पिया जाता है, एक हुक्के को एक नही दस दस लोग बेठ कर पीते है, ओर जो धुआं आता है वो पानी से फ़िलटर हो कर आता है, ओर जब यह हुक्का गांव की पंचायत या चोपाल पर या किसी के घर पिया जाता है तो वहां सारे गांव की बाते होती है, झगडे भी निपटाये जाते है, ओर जो भी व्यक्ति गांव की मर्यादा के अनुसार नही चलता उसे समझाया जाता है, अगर वो ना समझे तो उस का हुक्का पानी बन्द कर दिया जाता है, यानि वो गांव मै तो रहता है लेकिन उस से सब बोल चाल बंद कर देते है, जिसे आम भाषा मै कहते हे हुक्का पानी बंद.ओर तब तक उस आदमी को कोई नही बुलाता जब तक वो अपनी गलती ना मान ले.अगर वो हुक्का पीने आ जाये तो कोई उसे हुक्का नही देता .
यानि उस का समाजिक तॊर पर बहिष्कार, ओर ऎसा गांव की मरयादा को बचाने के लिये किया जाता है, फ़िर इन्हे बताया कि हमारे यहां बहुत से ऎसे कानून लोगो ने बना रखे है जो किताबो मै नही, लेकिन हमारे दिल ओर दिमाग पर लिखे है, भारत मै ऎसे कई गांव मिल जाये गे जहां आज तक पुलिस नही आई
Saturday, March 27, 2010 | 36 Comments
छोटी छोटी बाते... अर्थ बहुत गहरे
पिछले शुक्र बार को बच्चे बोले की उन के दोस्त ने एक पार्टी रखी है, वहा जरुर जाना है, ओर दोनो भाई तेयार हो गये, मेने उन्हे कहा कि तुम दोनो को छोड आता हुं, ओर जब भी पार्टी खत्म हो मुझे फ़ोन कर देना मे तुम्हे लेने आ जाऊंगा,बच्चे बोले पापा हम अब कार चला सकते है, हम चले जायेगे, तो मेने कहा अभी तुम्हे बर्फ़ के मोसम मै चलाने मै मुश्किल होगी, तो बच्चे थोडा उदास हो गये, तो मेने कहा जाओ लेकिन बहुत ध्यान से.... ओर जिस का डर था वो ही हुया, कार फ़िसली ओर अगले हिस्से मै राईट साईड मै कार ठुक गई,दुसरे दिन सुबह जब मे हेरी के संग निकला तो देखा, कार को देखने मै लगा कि ज्यादा नुकसान नही हुआ है,बच्चे भी कुछ देर बाद उठ गये तो बच्चो ने सारी बात बताई, ओर बताया कि कार तो चलती है बस थोडा ही फ़र्क पडा है.
दुसरे दिन मेने घर से करीब ६० किलो मीटर दुर जाना था, जब कार चलाई तो हेरान हुआ कि बच्चे केसे इस को घर तक ले आये, क्यो कि स्टेरिंग तो बहुत मुश्किल से घुम रहा है, ओर नयी कार होने के कारण मेने इस का डबल बीमा करवा रखा है, इस लिये इस तरफ़ तो कोई फ़िक्र नही.
आज सुबह मेने अपने बीमे वाले को फ़ोन किया, ओर सारी बात बताई, तो उन्होने ने मुझ से पुछा कि क्या कार चल सकती है, तो मेने कहां हां लेकिन आप के रिश्क पर, तो अब उन्होने एक वर्क शाप से मेरी कार को लेजाने के लिये एक गाडी भेजी, ओर जब तक मेरी कार ठीक नही होती या मुझे नयी कार नही मिलती, तब तक के लिये एक नयी कार उपलब्ध करवाई, जब मेने पुछा कि इन सब का खर्च कोन देगा तो उन्होने बताया कि जर्मन मै नयी कार खरीदने पर आप को यह सब सहुलियत उम्र (११,१२ साल) मिलती है कार कम्पनी की ओर से.सभी कम्पनियो से नही बस कुछ बडी कम्पनियो की ओर से.
अभी थोडी देर मै वो मेरी कार को ऊठा कर ले जायेगे, ओर उस के स्थान पर मुझे दुसरी कार दे जायेगे, ओर जब मेरी कार ठीक हो जायेगी तो मेरी कार को छोड जायेगे, ओर अपनी कार ले जायेगे, लेकिन अपने देश मै सुना है गारंटी सिर्फ़ पेपरो पर ही मिलती है, क्यो नही हम इन लोगो से लेना चाहे तो ऎसी अच्छी बाते ग्रहण करे, अपने देश ओर अपने देश बासियो के प्रति ईमान दारी से रहे.
मेरे दोस्त ने नयी कार ली दिल्ली मै उस की सर्विस करवाने से डर रहा है, कही पुर्जे ना निकाल ले..... तो क्या ऎसी बातो से हम सच मै अमीर बन सकते है?? तो क्यो नही हम अगर नकल ही करना चाहते है इन युरोप वालो की तो अच्छी बातो की नकल करे....ऎसी बहुत सी बाते है जो रोजाना हम देखते है, लेकिन कहते डरते है कि कोई इस बात को गलत ना समझे, वर्ना तो बहुत सी बाते है जो है तो छोटी छोटी लेकिन उन के अर्थ बहुत गहरे है,
Monday, March 15, 2010 | 34 Comments
जनाब क्या खायेगे? चलिये खुद ही देख ले क्या क्या मिलता है यहां
यह मुझे Mohan Vashisth जी ने मेल से भेजी ओर मेरे दिल को छुगई, मेने इसे आगे मेल करने कि व्जाय इस की पोस्ट बना दी..,,
आज सभी फ़ोटो गायब हो गये जी.... पता नही कहां
जाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ?
............ ... ........... .....थोड़ा पिज्जा कैसा रहेगा ?
नहीं ??? ओके ......... पास्ता ?
नहीं ?? .. इसके बारे में क्या सोचते हैं ?आज ये खाने का भी मन नहीं ? ... ओके .. क्या इस मेक्सिकन खाने को आजमायें ?दुबारा नहीं ? कोई समस्या नहीं .... हमारे पास कुछ और भी विकल्प हैं........
ह्म्म्मम्म्म्म ... चाइनीज ????? ??
ओके .. हमें भारतीय खाना देखना चाहिए .......हमारे पास अनगिनत विकल्प हैं ..... .. टिफिन ? मांसाहार ?
या केवल पके हुए मुर्गे के कुछ टुकड़े ?
आप इनमें से कुछ भी ले सकते हैं ... या इन सब में से,
थोड़ा- थोड़ा ले सकते हैं ...
अब शेष बची मेल के लिए परेशान मत होओ....
मगर .. इन लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है ..इन्हें तो बस थोड़ा सा खाना चाहिए ताकि ये जिन्दा रह सकें .......... इनके बारे में अगली बार तब सोचना जब आप किसी केफेटेरिया या होटल में यह कह कर खाना फैंक रहे होंगे कि यह स्वाद नहीं है !!
ही नहीं जाती.........अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी / समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप ००००० (केवल भारत में )पर फ़ोन करें - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे
लिए दुनिया की सबसे अच्छी जगह बनाने में सहयोग कर सकें -
'मदद
Sunday, February 28, 2010 | 17 Comments
दिल्ली वालो कुछ मदद तो करो ना?
मै शायद जनवरी या फ़रवरी मै एक सप्ताह के लिये भारत आऊ, इस बार भी अकेला ही आ रहा हुं, अभी टिकट नही ली, ओर मै दिल्ली ओर रोहतक मै ही रुकना चहुंगा, दिल्ली मै मेरे सभी रिश्ते दार है, ससूराल भी दिल्ली मै ही है, यार मित्र , दोस्त भी बहुत है...... लेकिन मै किसी के घर नही रुकना चाहता, ओर मै कई दिनो से नेट पर कोई अच्छा सा होटल ढुढ रहा हुं, करीब सात दिनो के लिये, स्टार चाहे ना हो, लेकिन होटल अच्छा हो, ओर एक दो कमरे का हो,बाथ ओर टाल लेट अंदर ही हो, अगर आप लोगो की नजर मै कोई अच्छा सा होटल हो तो जरुर लिखे.
होटल का किराया, कमरे के बारे, ओर आस पास का महोल, ओर होटल किस जगह है, यानि पुरी जानकारी अगर दे सके तो आप सब की मेहरबानी होगी..... मै इन्तजार मै हुं, आप लोगो के जबाब की.
राम राम
Sunday, December 20, 2009 | 30 Comments
ऒऎ भाई साहब जी क्या हाल है....
बात आज से बहुत पुरानी है, एक दिन मै ओर मेरी बीबी शहर मै खरीदारी कर रहे थे, गर्मियो के दिन थे, सो उस दिन बीबी ने अपनी भारतिया पहनावा ही यानि साडी पहन रखी थी, ओर जब हमारी बीबी साडी पहन कर बाजार जाती है तो लोग बहुत प्यार ओर इज्जत से देखते है, बस सब को पता लग जाता है एक एक भारतिया नारी भी उन के शहर मै रहती है, ओर लोग हमे रोक कर बहुत बाते करते थे भारत के बारे.
जब हम सडक पार करने लगे तो एक आवाज पीछे से आई... ओऎ भाई साहब जी क्या हाल है.... अब इस शहर मै मै अकेला भारतिया रहता हुं, लेकिन जब मेने पीछे मुड कर देखा तो कोई भी अपने जेसा रंग वाला नही दिखा, मैने सोचा शायद कान बजे होंगे, ओर मै फ़िर चल पडा, लेकिन फ़िर एक आवाज आई बादशाहो रुको ना...... मैने बीबी से पुछा तुम ने कुछ सुना तो वो बोली हां, मैने फ़िर मुड कर देखा, अब शहर भी इतना बडा नही था, ओर भीड भी ज्यादा नही थी, लेकिन मुझे अपने जेसा कोई नही दिखा, ओर मै सर पर हाथ फ़ेर कर चल पडा फ़िर से.
अभी दो कदम ही गया कि किसी ने कंधे पर हाथ रखा ओर शुद्ध हिन्दी मै बोला भाई साहब रुकिये, मेने मुड कर देखा तो मै हेरान मेरे सामने एक जर्मन हाथ जोड कर नमस्ते कह रहा था, मेने उसे जर्मन मै नमस्ते का जबाब दिया, ओर पूछा अभी अभी आप ने ही मुझे आवाज दे कर रोका था, तो वो बोला हां जी, मै उस से जर्मन मै बात कर रहा हुं, ओर वो मेरे साथ हिन्दी मै, मै उसे देख कर ओर हिन्दी बोलते देख कर हेरान था.
फ़िर उस ने मुझे कहा भाई हिन्दी मै बात करो ना, मैने माफ़ी मांगी ओर उस से हिन्दी मै पुछा कि तुम इसी शहर के रहने वाले हो? वो बोला हां, मै इसी शहर मै पेदा हुआं हुं, तो मेने उसे कहा कि मुझे बहुत साल हो गये है लेकिन आप को पहले कभी नही देखा, तो वो बोला मै इंजिन्यर हुं ओर हमेशा विदेश मै ही रहता हुं, तो मेने पूछा कि आप इतनी अच्छी हिन्दी बोल रहे है, क्या आप के मां बाप मै से कोई भारतिया है, तो उस ने मुझे कहा नही ऎसी बात नही दर असल मेने १२, १३ साल दुबई मै काम किया है, ओर इस दोरान मै अकेला ही जर्मन इंजिनियर था, बाकी सब लोग भारत ओर पकिस्तानी थे, ओर मै २४ घंटॆ उन लोगो के संग रहता था, ओर उन के संग रह कर मुझे हिन्दी पंजाबी ओर उर्दु बहुत अच्छी बोलनी आ गई.
मैने उसे अपने घर पर बुलाया कि आओ एक एक कप चाय पीते है, तो वो झट से तेयार हो गया, ओर घर आ कर मैने उस से बहुत सी बाते कि, उस ने मुझे बताया कि उसे भारतिया खाना सब से अच्छा लगता है, ओर वो बहुत बार भारत भी जा चुका है, उस की इच्छा है वो भारत मै ही कही बसना चाहता है.
मैने उसे बातो बातो मै कहा कि अब जर्मन लोग पहले जेसे नही रहे, थोडा बदल गये है, लेकिन मुझे कोई दिक्कत नही आज तक सभी प्यार से मिले है, ओर जब कभी मदद की जरुरत हो तो पडोसी मदद भी करते है, लेकिन फ़िर भी लगता है यह बदल गये है, तो मुझे उस ने कहा नही यह लोग तो पहले जेसे ही है, अच्छे बुरे जेसे भी थे पहले अब भी वेसे ही है, हां तुम बदल गये हो.... मैने हेरान हो कर पूछा केसे? तो उस ने मुझे कहा बिलकुल मेरे साथ भी यही हुया था दुबई मै, पहले पहल मै सोचता था यह भारत ओर पाकिस्तानी बहुत अच्छे है, लेकिन अब मुझे तु लोगो की जुबान आ गई तो मुझे अब पता चला कि लोग कई बार ( जो मुझे नही जानते) हंसते हुये मुझे गाली देते है, तो मै भी उन्हे उन की भाषा मै समझा देता हुं कि मै तुम्हारी बात समझता हुं, ओर चाहूं तो मै भी तुम्हे गाली दे सकता हुं. अब समझे पहले तुम्हे जर्मन नही आती थी, ओर कोई तुम्हे हंस के कुछ कहता था तो तुम सोचते थे, यह बहुत अच्छा है ओर अब तुम इन की भाषा समझते हो ओर अब तुम इन्हे सुन कर ही समझ जाते हो, यानि लोगो तो वेसे ही है, बस हम जब उन्हे अच्छी तरह समझने लग गये है.
अब वो भाई कहा है पता नही मेने भी वो शहर छोड दिया.
Saturday, November 28, 2009 | 22 Comments
धन्यवाद ब्लांगबाणी तेरा
ब्लांगबाणी ओर इस के संचालको को मेरा दिल से धन्यवाद, आप ने हम सब का मान इज्जत रख ली, सभी बेचेन हो गये थे, ओर मेरे जेसे तो बहुत ज्यादा थे, क्योकि हम आप सब ब्लांअबाणी को अपना मायका मानते है, जहा सब इकट्टे मिल जाते है, ओर कल का दिन कितना भारी गुजरा, यह हम बता नही सकते. आईंदा कोई भी गलती करे आप उसे एक नोटिस दे अगर नही समभलता तो बाहर का रास्ता दिखा दे.
आज आप को देख कर भगडां पाने को दिल करता है, ओर मेरे सभी भाईबहिनो को भी चाहिये कि आईंदा कोई ऎसा काम ना करे जिस का फ़ल हम सब को भुगतना पडे, वेसे मेरा दिल कहता था कि हमारा ब्लांग बाणी जरुर वापिस आयेगा. ओर आज आ गया
फ़िर से मेरी ओर मेरे सभी साथियो की तरफ़ से ब्लंग बाणी की पुरी टीम को हार्दिक धन्यवाद, आप खुब फ़लो. खुब तरक्की करो, खुश रहो, आप सब के मन कि मुरादे पुरी हो.
धन्यवाद
Tuesday, September 29, 2009 | 19 Comments
मां
मां क्या है , इस बारे सभी का अलग अलग अपना अपना ख्याल है, चलिये कुछ लोगो के ख्याल आप को बताये, शायद आप को पसंद आये, आप इन ख्यालो को पढ कर फ़िर अपने ख्याल भी लिखे ...
बाग के माली ने कहा...... मां एक बहुत ही खुब सुरत फ़ुल है, जो पुरे बाग को खुशवु देती है. आकाश ने कहा ......मां अरे मां तो एक ऎसा इन्द्र्धनुष है, जिस मै सभी रंग समाये हुये है. कवि ने कहा....... मां एक ऎसी सुन्दर कविता है, जिस मै सब भाव समाये हुये है. बच्चो ने कहा................मां ममता का गहरा सागर है जिस मे बस प्यार ही प्यार लहरे मार रहा है. वाल्मीकी जी ने कहा.......मां ओर मात्र भुमि तो स्वर्ग से भी सुन्दर ओर पबित्र है. वेद व्यास जी ने कहा.....मां से बडा कोई गुरु इस दुनिया मै नही. पैगम्बर मोहम्मद साहब ने कहा.... मां वो हस्ती है इस दुनिया की जिस के कदमो के नीचे जन्नत है. |
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Saturday, April 04, 2009 | 35 Comments
हार्दिक श्रद्धांजली
Thursday, November 27, 2008 | 6 Comments
मां
मां का मान
बाग के माली ने कहा...... मां एक बहुत ही खुब सुरत फ़ुल है, जो पुरे बाग को खुशवु देती है.
आकाश ने कहा ......मां अरे मां तो एक ऎसा इन्द्र्धनुष है, जिस मै सभी रंग समाये हुये है.
कवि ने कहा....... मां एक ऎसी सुन्दर कविता है, जिस मै सब भाव समाये हुये है.
बच्चो ने कहा................मां ममता का गहरा सागर है जिस मे बस प्यार ही प्यार लहरे मार रहा है.
वाल्मीकी जी ने कहा.......मां ओर मात्र भुमि तो स्वर्ग से भी सुन्दर ओर पबित्र है.
वेद व्यास जी ने कहा.....मां से बडा कोई गुरु इस दुनिया मै नही.
पैगम्बर मोहम्मद साहब ने कहा.... मां वो हस्ती है इस दुनिया की जिस के कदमो के नीचे जन्नत है.
Tuesday, October 14, 2008 | 16 Comments
आप सब को नमस्कार
यह इस ब्लॉग की पहली पोस्ट हे, और आप सब का सहजोग भी चाहिये ,
नमस्कार,मॆ काफ़ी समय से सोच रहा था,कि कुछ नया करु,लेकिन क्या ? बहुत सोचा लेकिन दिमाग मे कुछ भी नया नही आया, लोग पहले से ही हर आईडिया ले कर बेठे हे,लेकिन करना तो हे कुछ,जिस से मे लोगो को कुछ दे सकू,उन के दुख ओर सुख मे हाथ बटां सकु,लेकिन केसे ?फ़िर मेने सभी तो नही बहुत से ब्लॉग पढे, कविताये पढी, ओर बहुत कुछ पढा, फ़िर मेरे पास हिन्दी की कई पत्रिकाये आती हे, कभी कभी उन्हे पढा, तो एक बात समझ मे आई कि लोगो के दिल मे बहुत सी ऎसी बाते हे, जो वो किसी से कहना चाहते हे, लेकिन किस से कहे, आज किसी को अपना समझ कर आप ने दिल की बात कह दी, कल किसी बात पर मनमुटाव हो गया तो वो कही बात जग हसांई बन जाती हे,
तो बात किस से कहे, कई बार बहुत खुशी की बात होती हे, लेकिन हमे कोई मिलता नही जिस से बात कर सके, कभी दिल मे बहुत दुख होता हे,कई बार ऎसी बात होती हे जो कहना चाहते हे लेकिन शर्म से या फ़िर लज्जा से,हम अपने दिल की बात कह नही पाते, फ़िर वही बात हम अपने दिल मे सोच कर कुडते रहते हे, जो बाद मे कई बार बडी बीमारी का सबाब बन जाती हे,कई बार हमे आत्महत्या जेसे काम करने पर मजबुर कर देती हे.
बात करे तो किस से,किस पर भरोसा करे,कई लोग ऎसा सोचते हे,ओर वो सही सोचते हे,लेकिन मेने देखा हे कि अगर कोई भी बात हम किसी भी भरोसे वाले व्यक्ति से करे तो कई बार सही सलाह भी मिल जाती हे,यह मंच मेने यही सोच कर बनाया हे कि आप अपने दिल की कोई भी बात हमारे साथ बाटं सकते हे, हमे बता सकते हे, आप की पुरी गोपनियता रहे गी, अगर आप अपना नाम नही बताना चाहते तो किसी भी अन्य नाम से, बेनाम से टिपण्णी के रुप मे,email, के रुप मे हमे बताये, ओर अगर आप चाहते हे तो हम उस बात को प्रकाशित भी कर सकते हे, ताकि अधिक से अधिक लोगो की सलाह मिल सके,आप की कहानी आप के नाम के साथ, आप के नाम के बिना, जेसा आप चाहेगे, वेसे ही हम उसे प्रकाशित करेगे,
दिल की बात हम से बाटें, हमे आप का नाम ,पता, फ़ोन ना०, e mail, या अन्य जानकारी कुछ नही चाहिये, बस आप का सुख, दुख, आप जो किसी को कहना चाहते हे, ओर कोई मिलता नही तो हमे कहिये,अगर आप को सलाह चाहिये तो जितना हो सका हम सलाह जरुर देगे, अगर मे कुछ लोगो के होंठो पर एक मुस्कूराहठ ले आऊ तो मुझे खुशी होगी,
जब आप चाहे गे तभी आप की कहानी, आप की परेशानी, आप का सवाल, आप की खुशी प्राकशित होगी, आप चाहे गे तो आप के नाम के साथ आप चाहे गे तो आप का नाम बदल कर ओर जगहो के नाम, ओर पात्र बदल कर .
बहुत सी बाते हे, जो कुलबुलाती हे जिस से हमारा ब्ल्ड प्रेशर बढ जाता हे,अच्छी बुरी, कोई काम कर के हमे पछतावा होता हे,ओर किसी को बताना चाहते हे,पति से, पत्नि से कोई गलती हो गई सलाह चाहिये, क्यो कि आप ने जान बुझ कर गलती नही की, ओर अपने परिवार को भी नही खोना चाहते, बाप बेटे मे किसी बात को लेकर अनबन हे, भाई भाई , बहुत सी बाते हे,जब चाहो (अपना परिचय छुपा कर भी) मुझे लिखो, अपनी दिल की बात जो किसी से नही कह पाये ओर कहना चाहते हो तो उडेल दो.
लेकिन किसी के बारे मे मे यहां कोई अपशव्द नही लिखुगा, यह ब्लॉग आप सब का हे आप मुझे नये आडिया भी दे सकते हे,
धन्यवाद
राज भाटिया
Monday, August 25, 2008 | 12 Comments