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होली हे जी होली हे....

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आप सभी को सपरिवार होली की बधाई ओर शुभकामनाऎ;

जिन्दगी हो तो ऎसी हो...मस्त

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अजी हमारी क्या मजाल ऎसा कहे, आज तक सुनते आ रहे हे... पहले मां की सुनी, फ़िर बहिन की सुनी, इन के संग संग टीचर की सुनी, अब बीबी की सुनते हे, इस लिये यह हम नही कह रहे......:) वेसे बात तो काम की हे.

अगर विलायत मे आना हे तो देर मत करे जी जल्दी जल्दी जाये, क्योकि अब हनुमान जी ने संजीवनी बुटी लाने से तोबा कर ली हे, अब तो वीजे लगवा रहे हे, जल्दी कही देर ना हो जाये.

कर लो बात अरे भाई हम ने इंसानो की बात की हे खोते ओर गधो के वीजे यहां नही मिलते.


जेब मे जगह बनाने के लिये यह जगह भी अच्छी लगी. धन्यवाद


ताऊ के हाल शे, ताऊ जी क्या हाल हे जी

नये साल की शुभकामनाये!!!

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आप सभी को नये साल की बहुत बहुत शुभकामनाये, नये साल पर आओ मिल कर प्रण करे की हम देश के प्रति रोजाना एक अच्छा काम करे गे. इस साल ना रिश्वत लेगे ओर ना ही रिश्वत  देंगे पुरे साल. धन्यवाद



आप सब के लिये नये साल का एक उपहार... यहां देखे...
http://blogparivaar.blogspot.com/

चित्र भी बोलते है ....

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आप ही बताये क्या चित्र नही बोलते?

स्माईल प्लीज

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स्माईल प्लीज ! अबे मुस्कुराने को कहां है, दांत फ़ाड कर हंस क्यो रहा है,
नमस्कार

आईये मिले हमारे मेहमानो से

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नमस्कार,
काफ़ी दिनो बाद आज यह एक छोटा सा लेख आप लोगो की नजर कर रहा हुं, आज कल भारत से एक ब्लांगर मेहमान हमारे जर्मनी मै अपनी बेटी के पास आई हुयी है, जिन का नाम अरुणा कपूर है, इन के दो ब्लांग है, मेरी माला, मेरे मोती ओर दुसरा बात का बतंगड बहुत ही सुंदर लिखती है, यह यहां २ मई को आई थी , फ़िर हमारे यहां भी आई, ओर हम सब ने मिल कर काफ़ी जगह यहां सेर की,बस आप को वहां की कुछ फ़ोटो दिखा रहा हुं, फ़ोटो देख कर बताये केसा लगा हमारा जर्मन. सभी चित्रो के संग थोडा थोडा वर्णन भी किया है. आप किसी भी चित्र को बडा कर के भी देख सकते है

यह चित्र हमारे घर से करीब २०० किमी दुर चेको की सीमा के पास का है यहां हम ओर अरुणा जी का परिवार एक गेस्ट हाउस मै तीन दिन ठहरे थे, आस पास बहुत सुंदर दर्शय थे, यह शाम का समय है, बिलकुल सामने अरुणा जी साथ मै हमारी पत्नि बेठी है.

यह चित्र है "हरे रामा हरे कृष्णा" मन्दिर जो गोरो ने बनाया है,
यह चित्र पसाऊ का है, पसाऊ बबेरिया का एक पुराना शहर है, यहां गलियां भी है, ओर यहां पर तीन नदियो का संगम भी होता है, इस चित्र मै अरुणा जी मेरा छोटा बेटा ओर मै खुद खडा हुं, वेसे पसाऊ नया शहर भी है, लेकिन हम पुराने शहर मै ही घुमे.

यह चित्र उस जगह का है जहां तीनो नदियो का संगम होता है, यहां सिप भी चलते है, इस चित्र मै हमारी वीवी ओर अरुणा जी, एंवम उन की बेटी मोनिका



यह चित्र वापसी के समय का है , मोसम बहुत सुंदर था, ओर चारो ओर का नजारा बहुत ही सुंदर था, इस मै मेरा परिवार ओर अरूणा जी का परिवार है।यह चित्र हाऊसएन बर्ग का है जो पसाऊ से करीब २३ किमी की दुरी पर है.



यह चित्र भी हाउअसेन वर्ग का ही है, यहां पर जमीन के नीचे से पत्थर, सिक्का, ओर किमती पत्थर निकाले जाते है.






यहां भी लोग अलग अलग ग्रुपो मे अपना संगीत बजते है, खुब वीयर पीते है। इस चित्र मै अरुणा जी, हमारी धर्म पत्नि ओर हम






यह चित्र हमारे घर से करीब ६५,७० किमी दुर का है, जिसे किमजे परिन के नाम से जाना जाता है, इस झील के बीच मे एक महल है, जो यहां के राजा लुडबिग २ ने बनबाया था. इस चित्र मे मोनिका, हमारी थानेदारनी , अरुणा जी, मेरा बडा बेटा, फ़िर मेरा छोटा बेटा, मोनिका के पति देव, ओर उन का बडा लडका, मै केमरे के पीछे.


यह चित्र महल के सामने का है, यहां चारो ओर बहुत ही सुंदर नाजारा है, हम तो यहां कई बार आ चुके है.






यह चित्र सलियर सी का है, लेकिन हम यहां एक पहाडी पर है, आप नीचे झील देख रहे है, उस मै हम ने वोट भी चलाई




ऊपर पहाडी से हम फ़िसल कर आये थे, जाती बार तो कोंडल से ऊपर चलेगये थे, लेकिन वापसी मै मोनिका, अरूणा जी, ओर हमारी वीवी ही कोंडल से आये बाकी सभी फ़िसल कर आये

ताऊ की जीप

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ताऊ चला सब्जी मण्डी.....

आओ कुछ काम की बाते सीखॆ...

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अबे पढ ले, यह ताऊ तेरे को नही छोडने वाला........ चल बोल ग से गुडियां...

दोनो खुश...

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अजी खुद ही देख ले ना...

वसा से बचो, ज्यादा जियो...

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अजी ड्रा साहिब कहते है कि, फ़ेट यानि घी ओर घी से बनी चीजे कम खानी चाहिये.... लेकिन इस की शुरु आत तो नाशते से ही करनी पडेगी ना.....

जुकाम से परेशान है ???

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अरे बाबा आप जुकाम से परेंशा है कोई बात नही, हम देते है नया आईडिया, बहती नाक कुछ यू पोछे.......

आप भी कुछ यु खाते है क्या ?

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अजी सायानो का कहना है की गर्म गर्म खाने से मुंह जलता है, इसी किये तो.....

बरसात हमारा कया बिगाड लेगी जी

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क्या आप को भी ऎसा छाता चाहिये, बिलकुल घर सा महसुस करे

जपानी जुगाडिये

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दवा ऎसे डाले, अरे आंखे है या तेल की पीपी...

बच्चे केसे केसे

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देखिये इस बच्चे ने कुर्सी गले मै फ़ंसा कर कितनो को आफ़त मै डाल दिया..

ताऊ की सडक सेवा.....

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क्या आप भी बेठे गे इस कार मै...

वा अदव वा मुलाहिजा....

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देखिये तो सही क्या शान है, इसे कहते है दिलेरी.....
हिम्मत है जी.

सुरक्षित हाथो मै

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आप खुद ही देख ले यह सज्जन कितने सुरक्षित हाथो मै है, जुगाडिये हर देश मै मिलते है....

मां तो ऎसी ही होती है.

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अब हम क्या लिखे , यह चित्र खुद ही बोलते है, मां चाहे इंसान की हो, या फ़िर जानवर की, लेकिन मां तो मां ही होती है...















क्या ऎसी भी हो सकती है रेलवे लाईन ??

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यह है जर्मनी के शहर फ़्रेंक फ़ुर्त के रेलवे स्टेशन से मामुली आगे का चित्र... केसा भी मोसम हो लेकिन आप की ट्रेन कभी भी लेट नही आयेगी..... ओर कभी लेट आई तो आप को आप का पुरा हर्जाना मिलेगा , ओर टिकट के पेसे वापिस.
चाहे धुंध हो या मुसलाधार बरसात, या फ़िर बहुत बर्फ़ बारी लेकिन याता यात पर कोई असर नही पडता, क्योकि यहा कोई बहाना नही चलता.

मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।*जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा। महात्मा गांधी अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"महामना मदनमोहन मालवीय