जिन्दगी हो तो ऎसी हो...मस्त
अगर विलायत मे आना हे तो देर मत करे जी जल्दी जल्दी जाये, क्योकि अब हनुमान जी ने संजीवनी बुटी लाने से तोबा कर ली हे, अब तो वीजे लगवा रहे हे, जल्दी कही देर ना हो जाये.
कर लो बात अरे भाई हम ने इंसानो की बात की हे खोते ओर गधो के वीजे यहां नही मिलते.
जेब मे जगह बनाने के लिये यह जगह भी अच्छी लगी. धन्यवाद
ताऊ के हाल शे, ताऊ जी क्या हाल हे जी
Tuesday, January 04, 2011 | 15 Comments
नये साल की शुभकामनाये!!!
आप सभी को नये साल की बहुत बहुत शुभकामनाये, नये साल पर आओ मिल कर प्रण करे की हम देश के प्रति रोजाना एक अच्छा काम करे गे. इस साल ना रिश्वत लेगे ओर ना ही रिश्वत देंगे पुरे साल. धन्यवाद
आप सब के लिये नये साल का एक उपहार... यहां देखे...
http://blogparivaar.blogspot.com/
Friday, December 31, 2010 | 10 Comments
चित्र भी बोलते है ....

Monday, September 13, 2010 | 15 Comments
आईये मिले हमारे मेहमानो से
नमस्कार,
काफ़ी दिनो बाद आज यह एक छोटा सा लेख आप लोगो की नजर कर रहा हुं, आज कल भारत से एक ब्लांगर मेहमान हमारे जर्मनी मै अपनी बेटी के पास आई हुयी है, जिन का नाम अरुणा कपूर है, इन के दो ब्लांग है, मेरी माला, मेरे मोती ओर दुसरा बात का बतंगड बहुत ही सुंदर लिखती है, यह यहां २ मई को आई थी , फ़िर हमारे यहां भी आई, ओर हम सब ने मिल कर काफ़ी जगह यहां सेर की,बस आप को वहां की कुछ फ़ोटो दिखा रहा हुं, फ़ोटो देख कर बताये केसा लगा हमारा जर्मन. सभी चित्रो के संग थोडा थोडा वर्णन भी किया है. आप किसी भी चित्र को बडा कर के भी देख सकते है
यह चित्र हमारे घर से करीब २०० किमी दुर चेको की सीमा के पास का है यहां हम ओर अरुणा जी का परिवार एक गेस्ट हाउस मै तीन दिन ठहरे थे, आस पास बहुत सुंदर दर्शय थे, यह शाम का समय है, बिलकुल सामने अरुणा जी साथ मै हमारी पत्नि बेठी है.
यह चित्र पसाऊ का है, पसाऊ बबेरिया का एक पुराना शहर है, यहां गलियां भी है, ओर यहां पर तीन नदियो का संगम भी होता है, इस चित्र मै अरुणा जी मेरा छोटा बेटा ओर मै खुद खडा हुं, वेसे पसाऊ नया शहर भी है, लेकिन हम पुराने शहर मै ही घुमे.
यह चित्र उस जगह का है जहां तीनो नदियो का संगम होता है, यहां सिप भी चलते है, इस चित्र मै हमारी वीवी ओर अरुणा जी, एंवम उन की बेटी मोनिका
यह चित्र वापसी के समय का है , मोसम बहुत सुंदर था, ओर चारो ओर का नजारा बहुत ही सुंदर था, इस मै मेरा परिवार ओर अरूणा जी का परिवार है।यह चित्र हाऊसएन बर्ग का है जो पसाऊ से करीब २३ किमी की दुरी पर है.
यहां भी लोग अलग अलग ग्रुपो मे अपना संगीत बजते है, खुब वीयर पीते है। इस चित्र मै अरुणा जी, हमारी धर्म पत्नि ओर हम
यह चित्र हमारे घर से करीब ६५,७० किमी दुर का है, जिसे किमजे परिन के नाम से जाना जाता है, इस झील के बीच मे एक महल है, जो यहां के राजा लुडबिग २ ने बनबाया था. इस चित्र मे मोनिका, हमारी थानेदारनी , अरुणा जी, मेरा बडा बेटा, फ़िर मेरा छोटा बेटा, मोनिका के पति देव, ओर उन का बडा लडका, मै केमरे के पीछे.
Wednesday, May 27, 2009 | 23 Comments
वसा से बचो, ज्यादा जियो...
Tuesday, March 03, 2009 | 19 Comments
मां तो ऎसी ही होती है.
अब हम क्या लिखे , यह चित्र खुद ही बोलते है, मां चाहे इंसान की हो, या फ़िर जानवर की, लेकिन मां तो मां ही होती है...
Sunday, February 22, 2009 | 24 Comments
क्या ऎसी भी हो सकती है रेलवे लाईन ??
यह है जर्मनी के शहर फ़्रेंक फ़ुर्त के रेलवे स्टेशन से मामुली आगे का चित्र... केसा भी मोसम हो लेकिन आप की ट्रेन कभी भी लेट नही आयेगी..... ओर कभी लेट आई तो आप को आप का पुरा हर्जाना मिलेगा , ओर टिकट के पेसे वापिस.
चाहे धुंध हो या मुसलाधार बरसात, या फ़िर बहुत बर्फ़ बारी लेकिन याता यात पर कोई असर नही पडता, क्योकि यहा कोई बहाना नही चलता.
Saturday, February 21, 2009 | 31 Comments