आईये एक नया खेल खेले.....
आज मे एक फ़ोरम पर भटकता भटकता पहुचां, वहां एक बहुत सुंदर आईडिया देखा... यानि एक अति सुंदर खेल, सो़चा चलिये आप सब के संग भी खेले.
यह खेल वेसे तो हम बचपन मे भी खेलते थे, लेकिन अब भुल गये थे, तो वहां जा कर याद आ गया, यह खेल ऎसा हे कि हम एक फ़िल्म का नाम आप को यहां बतायेगे, आप ने उस से मिलता जुलता ही जबाब लेकिन फ़िल्म के नाम से ही देना हे, किसी भी भरतिया फ़िल्म का, एक जबाब बार बार भी दे सकते हे, यानि एक नाम कई बार ले सकते हे, लेकिन वो जबाब मिलना चाहिये.... उदाहरण के तोर पर...
चलती का नाम गाडी...... जबाब... विकटोरिया ना० २०४....
ऎसे ही एक लम्बी कतार मे जबाब पर जबाब देते जाये, जिस का जबाब सही मेल नही खायेगा, उसे टॊक कर आप आगे जबाब दे सकते हे, लेकिन गलत टोकने वाले के भी ना० कम होते जायेगे, ओर जिस के सभी जबाब सही मेल खायेगे वो विजेता होगा.
तो शुरु करे....
डोली सजा के रखना..... जबाब,,,,,,?
Tuesday, January 11, 2011 | 11 Comments
जिन्दगी हो तो ऎसी हो...मस्त
अगर विलायत मे आना हे तो देर मत करे जी जल्दी जल्दी जाये, क्योकि अब हनुमान जी ने संजीवनी बुटी लाने से तोबा कर ली हे, अब तो वीजे लगवा रहे हे, जल्दी कही देर ना हो जाये.
कर लो बात अरे भाई हम ने इंसानो की बात की हे खोते ओर गधो के वीजे यहां नही मिलते.
जेब मे जगह बनाने के लिये यह जगह भी अच्छी लगी. धन्यवाद
ताऊ के हाल शे, ताऊ जी क्या हाल हे जी
Tuesday, January 04, 2011 | 15 Comments
ब्लाग को बनाने ओर उस के बारे मे आप के सारे सवालो के जबाब
हमारे नये ब्लागर अकसर जब ब्लाग बनबा लेते हे दोस्तो से तो उन्हे बार बार छोटी छोटी बातो के लिये दुसरो का रास्ता ताकना पडता हे, या फ़िर बच्चो को बार बार तंग करते हे, अगर बच्चो को कुछ समझ हो, खास कर हमारी बुजुर्ग महिलाये जो ब्लाग पर कविताये, कहानियां, गजले, ओर अन्य जानकारियां तो बहुत अच्छी अच्छी देती हे, लेकिन थोडी सी कमी के कारण महीनो अपने पीसी से दुर रहती हे, ओर हमे उन के लेखो से वंचित रहना पडता हे,

लेकिन अब यह बिलकुल नही होगा, आज आप को मै इस ब्लाग जगत की सही चाबी पकडा देता हुं, ओर जब भी कोई मुसिबत आये तो मेरा नाम ले कर? अरे नही नही...... हा तो भगवान का नाम ले कर आप खुद ही इस मुसिबत से छूटकारा पा ले, बस यह काम जल्दी नही करना, बहुत आराम से स्टेप तू स्टेप बहुत ध्यान से, फ़िर आप भी मास्टर बन जायेगे जी.
लो जी चाबी तो आप को दी ही नही, ओर आप का दिमाग आधा खा गया, तो जनाब यह रही चाबी, अरे यहां किल्क करो ना, चाबी यही तो छिपा कर रखी हे, चलिये अब राम राम
Saturday, January 01, 2011 | 7 Comments




