कुंदन लाल सहगल भाग ४
अगले दस गीतो के साथ फ़िर से हाजिर हुं, उन गीतो को ले कर जिन्हे हम सब भुल से गये है, ओर वेसे गीत ओर वेसे कला कार ना तो दुवारा आयेगे ओर ना ही ऎसे गीत फ़िर हमे सुनने को मिलेगे.... तो लिजिये इन सदाबाहार १० गीतो के फ़ुलो का गुलदस्ता आप के नाम.....
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Saturday, December 06, 2008 | 2 Comments
आक्रोश,नफ़रत???
इस दुख की घडी मे मै अपनो से बहुत दुर बेठा हूं, ओर यह सारी घटनाये हम ब्लांग पर ,इन्ट्रनेट के जरिये भारतीय आखबरो से या फ़िर जर्मन टी वी ओर अन्य टीवी के साधनो से पता कर पाते है, ओर यह साधन ( टी वी ओर न्युज पेपर) कितने सच्चे है पता नही, लेकिन इन पर विशवास करने के सिवा कोई चारा भी नही, आज जर्मन टी वी पर बता रहे थे की आतंकी होटलो मे पहले से ही किसी न किसी रुप मे थे, कई गेस्ट के रुप मे तो कोई कर्मचारी के रुप मे थे, यानि वहां बहुत लोग थे हमला करने वाले, ओर यह न्युज देख कर मेरे मन मे एक खयाल आया. कि अगर ऎसा था तो आईंदा लोग नोकरी देने से पहले , होटल मे कमरा देने से पहले, घरो मे किराये पर मकान देने से पहले सॊ बार सोचेगें.
वेसे ऎसा हमारे यहां काफ़ी समय से है, अगर आप भारतीया है तो कोई प्रोबलम नही,(आप के नाम के साथ भारत लगा है, आप का धर्म कोई भी हो आप नेक इंसान है) आप को सब जगह स्वागत है, आप को नोकरी, माकन लेने मे कोई कठिनाई नही, लेकिन अगर आप पाकिस्तानी है तो ..... लेकिन अब इस हादसे( मुंबई) के बाद लगता है यह युरोपियन लोग भारतीया होने के साथ साथ अब हमारा धर्म भी ना पुछने लगे.
क्योकि यह मुंबई हादसे ने लोगो को(विश्व) को झंकोर के रख दिया है ,भारतीया लोग एक दम से सहम से गये है, क्यो कि हम कितना भी विदेश मे रह ले हमारी सोच, हमारा मन , हमारा दिल तो भारत मै ही है, हमारी पहचान भारत है, जब भारत मै कुछ अच्छा होता है हम सीना फ़ुला कर चलते है, ओर पुरे युरोप मै भारतीयो का ओर भारत का बहुत मान है, यह लोग हमारी संस्कृति को बहुत समान से देखते है ओर भारत को एक महान द्रिश्ति से देखते है.ओर भारत को एक शांति वाला देश समझते है,
कुछ खबरे मेरे भारत के वीर जवानो की जिन पर हमे मान होना चाहिये
'डर के आगे जीत है...' ,नेता लोगों को तो अपने काम से काम है, ये भीख मांगने आते हैं वोटों की और उसके बाद लोगों को भूल जाते हैं,
'यह किसी के लिए भगवान होने जैसा था'
Wednesday, December 03, 2008 | 13 Comments