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कुंदल लाल सहगल भाग १

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आईये आप को कुंदल लाल सहगल के भुले विसरे गीत सुनाऊ.... इन गीतो मे आज का शोर नही , लेकिन इन्हे सुन कर मस्ती सी छा जाती है, पहले पये दान मै मेने दस गीत ही रखै है, आप सुने ओर जरुर बताये केसे लगे.......

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ताऊ का नया काम

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एक बार ताऊ ने नया काम शुरू किया, इस बार उसने गधे पाल लिये, अब रोजाना जंगल मे गधॊ को चराने लेजाता ओर शाम को वापिस आता, ओर उस रास्ते मै एक थाना पडता था, ओर थाने के बिलकुल सामने एक बच्चो का स्कुल था, एक दिन ताऊ गधो को जंगल मे चरने के लिये लेजा रहा था कि एक गधे का बच्चा भाग कर स्कुल मे घुस गया, ओर ताऊ अपन लठ्ठ ले कर गधे के बच्चे के पीछे पीछे स्कुल मै घुस गया, ओर इधर उधर गधे के बच्चे को ढुढने लगा, अब ताऊ को देख कर बच्चे शोर मचाने लगे, तो मास्टर जी ने ताऊ को कहा, रे ताऊ भाग यहां से बच्चो को पढने दे, ताऊ वहा से चला आया ओर बोला ऎ मास्टर तु ही समभाल ले इब इस गधे के बच्चे को.
एक महीने के बाद ताऊ फ़िर स्कुल के सामने से गुजरा, ओर उसे अपना गधे का बच्चा याद आ गया, ओर ताऊ सीधा मास्टर के पास गया ओर बोला मास्टर जी मास्टर जी मेरा गधे का बच्चा कहां है, मास्टर जी किसी बात से पहले ही भरे बेठे थे, ताऊ को देख कर बोले वो सामने कुर्सी पे बेठा है तेरा गधे का बच्चा, ताउ ने उस तरफ़ देखा, वहां थाने दार अपनी वर्दी मे बेठा था,ताऊ तो बडा खुश हुआ ओर सीधा थाने दार के पास पहुच गया, ओर थाने दार के सर पर हाथ फ़ेर कर बोला , ओये मेरा गधे का बच्चा अब तो तु थाने दार बन गया, बस फ़िर क्या था, थाने दार उठा ओर ताऊ के दो तांगे मारी, तो ताऊ बोलेया रे गधे के बच्चे तु आदमी तो बन गया लेकिन लाट मारने की आदत नही छुटी.....

एक पहेली ???

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यह है इस पहेली का सही जवाव जो समीर जी ने दिया है , इस फ़ुल का
नाम पोपाये(poppy ) है भारत मै यह हिमाल्य ओर उस के आसपास मिलता है, धन्यवाद

बुझो तो जाने???? बताईये यह क्या है ? एक फ़ल?? या एक अधखिला फ़ुल?? या कुछ ओर , ओर इस का नाम क्या है????


मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।*जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा। महात्मा गांधी अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"महामना मदनमोहन मालवीय