मां
मां का मान
बाग के माली ने कहा...... मां एक बहुत ही खुब सुरत फ़ुल है, जो पुरे बाग को खुशवु देती है.
आकाश ने कहा ......मां अरे मां तो एक ऎसा इन्द्र्धनुष है, जिस मै सभी रंग समाये हुये है.
कवि ने कहा....... मां एक ऎसी सुन्दर कविता है, जिस मै सब भाव समाये हुये है.
बच्चो ने कहा................मां ममता का गहरा सागर है जिस मे बस प्यार ही प्यार लहरे मार रहा है.
वाल्मीकी जी ने कहा.......मां ओर मात्र भुमि तो स्वर्ग से भी सुन्दर ओर पबित्र है.
वेद व्यास जी ने कहा.....मां से बडा कोई गुरु इस दुनिया मै नही.
पैगम्बर मोहम्मद साहब ने कहा.... मां वो हस्ती है इस दुनिया की जिस के कदमो के नीचे जन्नत है.
Tuesday, October 14, 2008 | 16 Comments
कुछ सब से जुदा
मियां बीबी समुन्दर के किनारे घुम रहे हे....
बीबी, जी इसे बीच क्यो कहते हे ?
मियां, अरे तुम्हे नही पता,? बात यह हे की यह जमीन ओर आसमान के बीच मे हे ना इस लिये इसे बीच कहते हे।
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हंसी के लिये गम कुरबान....
खुशी के लिये आंसु कुरबान,
दोस्त के लिये जान कुरबान,
ओर आज के जमाने मे
अगर दोस्त की गर्ल फ़्रेन्ड मिल जाये
तो साला दोस्त भी उस पर कुरबान
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एक रिपोर्टर अच्छा सरदार जी आप बतायेगे यह सब अचानक केसे हो गया ?
सरदार जी , ओये जी होना क्या था, अचानक आंउसमेन्ट हुई की दिल्ली जाने बाली ट्रेन प्लेट फ़ार्म दो पर आ रही हे, तो सारे लोग झट से पटरियो पर कुद गये ओर तभी पटरियो पर ट्रेन आ गई ओर सब नीचे आगये,
रिपोर्टर, फ़िर आप केसे बच गये ? लगता हे आप समझ दार थे जो कुदे नही !!!!!
सरदार जी, ओये जी नही मे तो आत्महत्या करने आया था जब मेने सुना कि ट्रेन प्लेट्फ़ार्म पर रही हे तो मे झट से प्लेटफ़ार्म पर आगया था????
Saturday, October 11, 2008 | 14 Comments
शराबी जमीं पै
एक शराबी फ़िल्म **तारे जमीं पर** देख कर आधी रात को घर लोटा ता है ओर साथ साथ मे गुनगुना रहा है... आप भी सुने अरे नही मेने सुना ओर अब यहां लिखा दिया अब आप भी पढे उस गरीब शराबी के मन का दुख....
शराबी जमीं पै.....
मै कभी बतलाता नहीं...
ठेके पे रोजाना जाता हूं मै मां.......
युं तो मे दिखलाता नही.....
दारू पी कर रोज आता हुं मै मां........
तुझे सब हे पता, हें ना मां....
तुझे सब हे पता, मेरी मां....
ठेके पै युं ना छोडो मुझे......
घर लोट के भी आ ना पाऊं मै मेरी मां.....
पाऊआ लेने भेज ना इतना दुर मुझे तु....
नशे मे घर भी ना भुल जाउ मै मां.....
क्या इतना बुरा हुं मै मां.....
क्या इतना बुरा हुं मै मां.... मेरी मां....
स्काच मे इतना पीता नही.....
एक पेग से सहम जाता हु मै मां
चेहरे पे आने देता नही....
लेकिन कभी कभी लुडक जाता हुं मै मां....
क्या इतना बुरा हुं मै मां.....
क्या इतना बुरा हुं मै मां.... मेरी मां.... ............................
Wednesday, October 08, 2008 | 19 Comments